नई दिल्लीः लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम के बाद ईरान ने सद्भावना दिखाते हुए होर्मुज खोलने का ऐलान किया था। लेकिन शनिवार की सुबह होते-होते स्थिति बदल गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोले जाने के ऐलान के बाद भी अमेरिकी नाकाबांदी जारी रहने के चलते ईरान और वाशिंगटन में फिर ठन गई है। इसके बाद होर्मुज को पार करने का प्रयास करने वाले दर्जनों जहाजों को वापस लौटते देखा जा रहा है। इस बीच ईरान की सरकारी प्रेस मीडिया ने जहाजों का ट्रैकिंग डेटा वाला एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों के काफिले को लौटते देखा जा रहा है।
इसमें सख्त संदेश लिखा है, “सैन्य जहाजों और शत्रुओं के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का कोई अधिकार नहीं।”…इस संदेश और होर्मुज से लौटते जहाजों को देखने से साफ पता चल रहा है कि ईरान ने फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। ईरान ने होर्मुज को पिछली स्थिति में ले जाने का बयान भी जारी कर दिया है। ईरानी सरकारी टीवी ने सैन्य कमान के हवाले से कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट अब फिर से अपनी पुरानी स्थिति में लौट आया है, यानी होर्मुज दोबारा बंद किया जा चुका है। ईरान ने कहा कि अब होर्मुज सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन के में है।
इस तनाव की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद मानी जा रही है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही ईरान रास्ता खोल दे, लेकिन अमेरिका तब तक अपनी नाकेबंदी नहीं हटाएगा। जब तक तेहरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर वाशिंगटन के साथ कोई ठोस समझौता नहीं कर लेता। हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 5वां हिस्सा (करीब 20 प्रतिशत) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। पिछले दो महीनों से जारी इस युद्ध और नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और कई देशों में ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है। बीते दिनों होर्मुज के खुलने की खबर के बाद तेल और गैस के संकट को लेकर आम आदमी राहत की सांस ले रहा था।
