नई दिल्ली: ईरान के हजरत खातम अल-अनबिया सैन्य मुख्यालाय ने इस बात की पुष्टि की है कि ओमान सागर में एक ईरानी जहाज पर अमेरिका ने हमला किया और इसे जब्त कर लिया। ईरान बयान में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी नौसेना ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए ईरानी पोत का निशाना बनाया और इसे समुद्री डकैती के रुप में रोका।
बताया गया कि अमेरिकी सैनिकों ने जहाज के डेक पर तैनात होकर नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय किया। साथ ही ईरान ने चेतावनी दी कि उसकी सशस्त्र सेनाएं जल्द ही इस कार्रवाई का जवाब देगी और बदला लेंगी।
नाकेबंदी पार करने की कर रहा था कोशिश
यह घटना अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) द्वारा जारी बयान के सामने आई जिसमें बताया गया है कि रविवार को होर्मज स्ट्रेट के पास एक ईरानी मालवाहक जहाज जिसे नाकाबंदी को पार करने की कोशिश करते हुए पाया गया तो अमेरिकी नौसेना ने जबरन कब्जे में लिया। यह घटना ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी शुरु होने के बाद पहली बार बड़ी कार्रवाई की है।
ईरानी जहाज उस समय उत्तरी अरब सागर में बंदर अब्बास की ओर बढ़ रहा था। जिसकी गति 17 समुद्री मील प्रति घंटे थी। अमेरिका नौसेना ने बार-बार चेतावनी दी कि यह जहाज नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा है लेकिन छह घंटे तक चेतावनी को नजरअंदाज करने के बाद अमेरिकी युद्धपोज USS spruance ने जहाज के इंजन रुम में छेद करके उसे रोक दिया। इसके बाद 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के अमेरिकी सैनिकों ने जहाज पर चढ़कर कार्रवाई और जहाज फिलहाल अमेरिकी हिरासत में है।
सोच-समझकर किया गया कब्जा
अमेरिकी कमान ने कहा कि कार्रवाई पूरी तरह सोच समझकर पेशेवर और उचित तरीके से की गई है। नाकाबंदी शुरु होने के बाद 25 कमर्शियल जहाजों को लौटने का निर्देश दिया है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी तोड़ने वाली जहाज को पूरी तरह अपने निंयत्रण में ले लिया है।
होर्मुज में बढ़ा तनाव
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की चेतावनी और अमेरिकी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर चुनौती के तहत ला दिया है। यह हालात इस्लामाबादा में प्रस्तावित शांति वार्ता के ठीक पहले घटित हुआ जिससे बात की संभावनाओं पर भी असर पड़ा है।
