अमृतसरः सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कमेटी पर उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने तथा उनकी निजी गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।
ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में जब वह अपने सरकारी आवास से अपना सामान स्थानांतरित कर रहे थे, तो प्रशासकों ने सेवकों से लिखित में हस्ताक्षर करवाए कि ज्ञानी जी के सामान को बिना जांच-पड़ताल के बाहर न जाने दिया जाए। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने इस कार्रवाई को अत्यंत निंदनीय बताया और कहा कि एक ऐसे सेवक के निजी सामान की तलाशी लेना बहुत अपमानजनक है, जिसने लंबे समय तक गुरु घर की सेवा की हो। तलाशी केवल किसी अवैध वस्तु के संदेह पर ही ली जाती है, लेकिन यहां जानबूझकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की गई है।
अपनी सेवानिवृत्ति के बारे में बात करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि उनकी सेवा के 2 साल से अधिक शेष थे, लेकिन उन्हें 26 फरवरी, 2026 को जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया, जबकि वह मेडिकल अवकाश पर थे। उनके आवास पर आने-जाने वाले लोगों की कर्मचारियों द्वारा जासूसी और निगरानी की जा रही है। वह घर खाली करने के लिए तैयार हैं, लेकिन नए आवास के नवीनीकरण के कारण उन्होंने 10-12 दिन और मांगे थे। फंड के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उन्होंने 36 वर्षों तक गुरु रामदास के घर की सेवा की है; यदि कमेटी फंड जारी करती है तो ठीक है, अन्यथा वह गुरु भरोसे हैं। उन्होंने प्रशासकों से अपील की कि प्रशासन में नैतिकता और शालीनता बनाए रखी जानी चाहिए।
