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Hormuz Of Straight में चल रहे तनाव के बीच भारत ने रुस से मिलकर पलटा Plan, 2030 तक होगा ये काम

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच में चल रहे तनाव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के कारण दुनियाभर में तेज और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे समय में भारत ने एक बड़ा और समझदारी भरा कदम उठाया है ताकि उसे तेल की कमी का सामना न करना पड़े। भारत सरकार ने फैसला किया है कि अब रुसी तेल वाले जहाजों के लिए बीमा देने वाली रुसी कंपनियों की संख्या बढ़ जाएगी। पहले 8 कंपनियों को अनुमति थी। अब इसे बढ़ाकर 11 कर दिया गया है। यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने लिया है।

ये कंपनियां जहाजों को खास तरह का बीमा देती है। इसको P&1 कवर कहते हैं। यह बीमा बहुत जरुरी होता है क्योंकि इसके बिना कोई भी जहाज अंतराष्ट्रीय समुद्र में काम नहीं कर सकता है। असर में रुस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियों ने रुसी तेल ढोने वाले जहाजों को बीमा देना कम कर दिया था। इससे भारत के सामने समस्या खड़ी हो गई थी क्योंकि वह बड़ी मात्रा में रुस से तेल खरीद रहा है। अब भारत ने रुसी कंपनियों को मंजूरी देकर इस परेशानी का हल निकाल लिया है।

इन कंपनियों को मिली अनुमति

दुनिया की कुछ बड़ी कंपनियां जैसे कि गजप्रोम इंश्योरेंस औऱ रोसगोस्त्राख को फरवरी 2027 तक काम करने की अनुमति मिल गई है। वहीं VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी कंपनियों को 2030 तक की मंजूरी मिली है। इससे साफ है कि भारत ने सिर्फ अभी की नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों की तैयारी कर ली हुई है। इसके अलावा कुछ और कंपनियों को भी शामिल किया गया है और दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब कंपनी को फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, ताकि विकल्प ज्यादा हों और किसी एक पर निर्भरता कम हो।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ रहा तनाव

यह फैसला उस समय लिया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा हुआ है। यह रास्ता दुनिया के लिए बहुत जरुरी है, क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से आता-जाता है। यदि यहां पर कोई रुकावट आएगी तो तो इसका असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है और हाल के समय में उसने रूस से सस्ता तेल खरीदना बढ़ाया है। ऐसे में यह जरूरी था कि तेल लाने में कोई रुकावट न आए। भारत का यह कदम एक तरह से सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। इससे तेल की सप्लाई बनी रहेगी और देश की ऊर्जा जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकेंगी। होर्मुज में जारी टेंशन के बीच भारत ने रूस से मिलकर कर दिया खेल! 2030 तक तेल की किचकिच होगी खत्म

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