नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रुसी पेट्रोलियम के आयात पर लगे हुए बैन से जुड़े अमेरिकी कानून पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि वह इस कानून की समीक्षा करने वाले हैं परंतु इसके साथ ही उन्होंने नीति में तुरंत किसी भी तरह के बदलाव का संकेत नहीं दिया है। यह मामला ट्रंप प्रशासन के रुसी डीजल के लेन-देन को दी गई मंजूरी के बाद बढ़े विवाद के बीच में सामने आया है।
मीडिया ने ओवल ऑफिस में ट्रंप को यह याद करवाया कि यह बैन अमेरिकी संसद के द्वारा पास किया गया था। इसके बाद 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस पर साइन किए थे। उस दौरान ट्रंप ने यह कहा था कि – ‘शायद एक ही काफी खराब कानून है मैं इसको जरुर देखूंगा।’
आखिर क्या है पूरा मामला?
एक मीडिया कर्मी ने अमेरिकी की ओर रुसी डीजल लेकर आने वाले जहाज और उसके माल को उतारने से जुड़े कानूनी पांबदियों पर सवाल उठाया था। इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था कि वह इसकी जांच करेंगे लेकिन उन्होंने इस बैन को हटाने या कानून में संसोशन की कोई निश्चित समय सीमा या योजना नहीं बताई थी। यह पूरा विवाद तब शुरु हुआ जब अमेरिका के वित्त मंत्रालय ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने कुछ हफ्ते पहले 9 अक्टूबर को एक खास जनरल लाइसेंस जारी किया था। इस लाइसेंस के अंतर्गत 7 अप्रैल 2027 तक रुसी डीजल की बिक्री, डिलीवरी और आयात से जुड़ी वित्तीय लेनदेन की छूट दी गई थी।
इस वजह से बढ़ा विवाद
2022 में बना एंडिंग इम्पोर्टेशन ऑफ रशियन ऑयल एक्ट साफ तौर पर रुस से आने वाले पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर रोक लगाता है। इस कानून के अंतर्गत बैन हटाने की एक सख्त प्रक्रिया है। इसमें संसद की समीक्षा और राष्ट्रपति के कुछ खास शर्तों के पूरा होने की पुष्टि करना भी जरुरी है। न्यूजर्सी की गर्वनर मिकी शेरिल ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने 2 नवंबर को पोर्ट ऑपरेटर्स को चिट्ठी लिखकर कहा है कि रुसी ईंधन के आयात की मंजूरी देना संघीय कानून का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यू जर्सी ऐसे किसी भी आयात को रोकने के लिए कानूनी कदम जरुरी उठाएगा।
