नई दिल्ली: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार मिली है। ऐसे में इसके बाद अब ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी यह माना है कि ईरान के साथ युद्ध चुनाव में हार का बड़ा कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई है और इससे मतदाताओं पर असर पड़ा। हालांकि ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि यदि उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिला तो वो ईरान पर हमला करने का फैसला फिर से लेंगे।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी चुनाव परिणामों को ट्रंप की रणनीतिक और राजनीतिक हार भी बता दिया है हालांकि ईरान के सर्वोच्च नेता ने यह भी कह दिया है कि चुनाव में सत्ता का समीकरण बदलने से अमेरिका की ईरान नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
ईरान पर दोबारा हमला करेंगे ट्रंप
मीडिया के साथ बात करते हुए व्हाइट हाउस में ट्रंप से यह पूछा गया कि क्या फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरु किया गया ईरान युद्ध उनकी पार्टी की चुनावी हार का कारण बना है? इस पर ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पोस्ट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि – ‘यह बात काफी हद तक सही है’। वेंस ने एक्स पर लिखा कि – ‘रिपब्लिकन पार्टी की हार का कारण युद्ध है’। उनका कहना था कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का समर्थन करने वाले कई मतदाताओं ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से नाराज होकर रिपब्लिकन पार्टी से दूरी बना ली है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण अल्पावधि में पेट्रोल की कीमतें कुछ हद तक बढ़ गई है हालांकि उनका यह भी कहा है कि – ‘यदि मुझे दोबारा फिर से ऐसा करना पड़े तो मैं फिर करुंगा। ट्रंप का यह तर्क है कि लंबे समय के लिहाज से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का एक यही रास्ता है’।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए तो भविष्य में वहां पर मौजूद कई चीजें शायद बची नहीं रहेगी। बाद में एक और सवाल के जवाब में उन्होंने दोहराया कि ईरान युद्ध को लेकर वह कोई अलग फैसला नहीं लेंगे।
कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को झटका लगने के बाद वाशिंगटन की तेहरान के प्रति नीति बदलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बयान में यह कहा है कि जो लोग उम्मीद लगा रहे हैं कि अमेरिकी राजनीतिक दलों या फिर गुटों में बदलाव से उसकी दबदबे वाली व्यवस्था का व्यवहार बदल जाएगा तो यह उनकी गलतफहमी है। इसी तरह से अमेरिका की रियायतें लेकर ईरान के प्रति उनकी दुश्मनी खत्म करने की उम्मीद करना भी बहुत बड़ी भूल है।
खामेनेई ने यह चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से दोबारा ऐसी आक्रामक कार्रवाई की गई तो युद्ध का दायरा पहले से कहीं ज्यादा व्यापक हो जाएगा।
