चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं का आह्वान किया कि वे संत रविदास के विचारों को केवल पुस्तकों और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि जहां किसी के साथ भेदभाव हो, वहां समानता के पक्ष में खड़े हों; जहां किसी को सहायता की आवश्यकता हो, वहां सहयोग के लिए आगे आएं और जहां किसी को अवसर न मिल रहा हो, वहां उसके लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करें। यही संत रविदास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राज्यपाल आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में ‘संत रविदास: परम्परा, परिवर्तन और प्रतिरोध की चेतना’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के साथ संत रविदास के विचारों, सामाजिक दर्शन तथा समतामूलक समाज की अवधारणा पर अपने विचार साझा किए।
प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि संत रविदास की ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना भय, भेदभाव और अन्याय से मुक्त ऐसे समाज का संदेश देती है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों। आज आवश्यकता है कि इसी भावना के अनुरूप ऐसे भारत का निर्माण किया जाए, जहां प्रत्येक बच्चे को शिक्षा मिले, प्रत्येक युवा को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो, महिलाओं को समान अवसर मिलें और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सके। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
प्रो. घोष ने कहा कि भारत आज तेजी से प्रगति कर रहा है। प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल क्रांति और नए आर्थिक अवसर विकास की नई संभावनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रगति के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि विकास की यात्रा में कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। वास्तविक विकास वही है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सम्मान, समान अवसर और आगे बढ़ने का अधिकार मिले।