चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में भूजल संसाधनों के संरक्षण, विनियमन और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण’ (HWRA) ने जनहित में एक बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण द्वारा उद्योगों, बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और खनन परियोजनाओं के लिए भूजल निष्कर्षण के नियमितीकरण को सुगम बनाने हेतु विलंब शुल्क (लेट फीस) में 30 नवंबर, 2026 तक विशेष छूट प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण अधिनियम, 2020 के तहत गठित यह प्राधिकरण प्रदेश में भूजल और सतही जल के उपयोग की निगरानी और विनियमन का कार्य कर रहा है। नियम अनुसार, राज्य में किसी भी औद्योगिक, अवसंरचनात्मक या खनन परियोजना के लिए भूजल का उपयोग करने से पहले प्राधिकरण से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्राप्त करना अनिवार्य है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि 30 नवंबर, 2026 तक मिलने वाली इस छूट के बाद, 1 दिसंबर, 2026 से प्राधिकरण के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार ही लेट फीस ली जाएगी। छूट श्रेणी में आने वाले उपयोगकर्ताओं को छोड़कर अन्य सभी भूजल उपयोगकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्राधिकरण के आधिकारिक पोर्टल https://hwra.org.in के माध्यम से अपने आवेदन जमा करवाएं और आवश्यक एनओसी प्राप्त करें। समय सीमा के भीतर एनओसी न लेने या नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट्स के खिलाफ लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।