चंडीगढ़: पंजाब विधान सभा द्वारा आज वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) के तहत मतदाता सूचियों के संशोधन के दौरान योग्य नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों से यह भी अपील की गई कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूचियों में मौजूद खामियों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
सदन को संबोधित करते हुए आप विधायक और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रत्येक योग्य नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 चुनाव प्रणाली की निगरानी करने, मतदाता सूचियों में भेदभाव रोकने और वयस्क मताधिकार की गारंटी संबंधी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
आजादी से पहले के उस युग को याद करते हुए जब मतदान का अधिकार समाज के कुछ चुनिंदा वर्गों तक ही सीमित था, कैबिनेट मंत्री ने हर वयस्क नागरिक के लिए समान मतदान का अधिकार देने की संवैधानिक नींव रखने के लिए भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आगे कहा, “मतदान का अधिकार एक विशेष लोकतांत्रिक अधिकार है जो गरीबों, श्रमिकों, दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के हर वर्ग को देश के शासन में समान भागीदारी का अवसर देता है।”
सदन द्वारा प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन किए जाने की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार केवल एक प्रशासनिक रस्म नहीं है बल्कि यह आम नागरिक की आवाज है और लोकतंत्र में समान भागीदारी की स्पष्ट अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा, “इस अधिकार की रक्षा करना हमारी सामूहिक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जो राजनीतिक विचारों से ऊपर है।”