जालंधर, ENS: वकीलों का लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) प्रणाली के विरोध में प्रदर्शन जारी है। वहीं दूसरी ओर इस पॉलिसी को लेकर LADC के चीफ एडवोकेट हरनेक सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने वकीलों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन और LADC पॉलिसी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। एडवोकेट ने कहा कि उनके साथ 6 से 7 अन्य वकील भी इस पॉलिसी को लेकर काम कर रहे है। वहीं पॉलिसी से होने वाले नुकसान को लेकर कहाकि अगर इससे किसी पीड़ित को कोई नुकसान हो रहा है तो वह उनके पास आकर हुए नुकसान के बारे में बताए। उनका मानना है कि इस पॉलिसी के तहत गरीब लोगों को LADC पॉलिसी के तहत सहायता दी जाती है, जबकि जो अमीर व्यक्ति का केस वह खुद भी नहीं लेते और उसे प्राइवेट वकील करने की अपील की जाती है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के परिवार में कोई है ही नहीं और वह जेल में बंद है या फिर किसी के पास केस के लिए पैसे नहीं है, वह उन दोषियों के केस को इस पॉलिसी के तहत देखते है। वहीं इसका विरोध किए जाने पर कहा कि इसके बारे में विरोध करने वाले ही बता सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इस पॉलिसी को लेकर ज्यूडिशली काफी खुश है और लोगों ने भी राहत की सांस ली है। उन्होंने कहाकि कानून 4 साल पहले ही लागू हो गया था, लेकिन इसका अब विरोध होने लगा। ऐसे में इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
चीफ के अनुसार पॉलिसी में कोई कमियां नहीं है। इस पॉलिसी के तहत सीजेएम के अफसर उनके काम की देखरेख कर रहे है। इसके बाद लोकल सेशन जज उनके काम की देखरेख कर रहा है। इसी के साथ जिस जज के साथ वह काम कर रहे है, वह भी इसकी देखरेख करते है। जिसके बाद पंजाब लेवल के सेशन जज हमारी रिपोर्ट को हर महीने देखते है। इस पॉलिसी के तहत जो कमियां पाई गई थी उसे निकाला गया है और उसके बाद ही स्कीम को लागू किया गया। इस स्कीम का सक्सेस रेट 80 से 90 प्रतिशत है। चीफ के अनुसार अब तक 80 से 90 प्रतिशत लोगों को इंसाफ दिलाकर उन्हें बरी करवाया गया।
उन्होंने कहाकि पहले पेनल लॉयर होते थे, जैसे बार में से 80 से 90 पैनल लॉयर ले लिए और उन्हें केस दे दिए जाते है। इस केस में उन्हें फीस भी काफी मिलती थी। ऐसे में केस की 10 से 12 हजार रुपए फीस मिलती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट लेवल में जब कुछ केस गए तो उसमें पाया गया कि कुछ केस सही तरीके से नहीं लड़े गए थे। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज जूजू लतित इसके इंचार्ज बनें और उन्हें इसे पॉयलेट प्रोजेक्ट को शुरू किया। एडवोकेट के अनुसार यह पॉलिसी इंगलैंड, यूएस सहित अन्य विदेशों में चल रही है।

