नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ओमान के पास समुद्र में एक कंटेनर जहाज पर हमला हुआ है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा सीजफायर की डेडलाइन बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही देर बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और गंभीर हो गई। यूके मैरीटाइम ट्रैफिक ऑर्गनाइज़ेशन ने बुधवार को बताया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक कंटेनर जहाज पर हमला कर दिया है। बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एक गनबोट कंटेनर जहाज के पास पहुंची। उसने जहाज पर गोलीबारी करने से पहले कोई रेडियो चेतावनी नहीं दी।
यह हमला ओमान के तट से लगभग 15 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में हुआ। जहाज के कप्तान ने बताया कि ईरानी गनबोट ने बिना किसी चेतावनी के अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में जहाज के ब्रिज (कंट्रोल रूम वाला हिस्सा) को काफी नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि जहाज से किसी आग लगने या पर्यावरणीय प्रभाव की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। जहाज पर मौजूद सभी कर्मचारी पूरी तरह सुरक्षित हैं। UKMTO ने इस रास्ते से गुजरने वाले अन्य जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का सहारा लिया है, ताकि वह ईरान जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ खत्म करे।
यह अहम समुद्री मार्ग है, जिससे शांति काल में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल गुजरता था। इस जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ के कारण तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अलग दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्रुएंस ने अरब सागर में ईरानी जहाज तूसका (TOUSKA) को रोका था। अमेरिका के अनुसार, इस जहाज ने समुद्री घेराबंदी के नियमों को तोड़ा था। फिलहाल इस इलाके में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। IRGC ने चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी सेना की इस सशस्त्र डकैती का बदला जरूर लेंगे। युद्धविराम की अवधि बढ़ने के बावजूद दोनों देशों के बीच हालात गंभीर बने हुए हैं।
