चंडीगढ़: हरियाणा में मृत्यु के कारणों से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए रोहतक जिले में आईसीएमआर-वित्तपोषित वर्बल ऑटोप्सी परियोजना का पायलट परीक्षण करेगा। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत रोहतक को पायलट जिले के रूप में चुना गया है। इस परियोजना का उद्देश्य स्वास्थ्य नियोजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्णयों को समर्थन देने के लिए मृत्यु के कारणों की अधिक व्यवस्थित जानकारी जुटाना है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस परियोजना के तहत कार्यान्वयन अवधि के दौरान लगभग 5,000 मौतों को शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत स्वास्थ्य प्रणाली के नामित कर्मी पात्र मौतों की पहचान करेंगे और एक निर्धारित मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से वर्बल ऑटोप्सी (मौखिक) साक्षात्कार आयोजित करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत एक डिजिटल वर्कफ़्लो का पालन किया जाएगा, जिसमें वर्बल ऑटोप्सी साक्षात्कार निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। इस अभ्यास में शामिल कर्मियों को कार्यप्रणाली और डिजिटल प्रक्रिया पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह पहल मृत्यु के कारणों की जानकारी को दस्तावेज़बद्ध करने और रिपोर्ट करने में स्वास्थ्य कर्मचारियों की क्षमता को मजबूत करने का भी प्रयास करती है।
