नई दिल्ली: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। इस कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये का प्रावधान भी किया गया था। विधेयक पारित होने के बाद पीएम मोदी ने इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया है परंतु इस पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी पर तंज कस दिया है। इस पर विपक्ष और CJP कानून की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
राज्यसभा से मिल चुकी है मंजूरी
लोकसभा के बाद में अब गुरुवार को राज्यसभा ने एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। अब इसको विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भी भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद अब यह कानून लागू हो जाएगा। नए कानून के अंतर्गत प्रश्नपत्र लीक करने जैसे अपराधों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक की जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पेपर माफिया को नहीं बख्शा जाएगा
विधेयक पास होने के बाद पीएम मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह कानून देश में भरोसेमंद और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पीएम ने कहा कि पेपर माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार तकनीक और सख्त कानूनों के जरिए परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगी।
पीएम की प्रतिक्रिया पर किया है आलोचना
पीएम के वीडियो पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी आलोचना की है। दीपके ने टिप्पणी लिखी है कि – ‘आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है’। राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब सात घंटे तक चर्चा हुई है। इस दौरान वामदलों और डीएमके की ओर से लाए गए संशोधन प्रस्तावों को सदन ने खारिज कर दिया है। चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अंतर्गत पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान
संसद के दोनों सदनों से पारित यह संशोधन विधेयक वर्ष 2024 के अंतर्गत के मूल कानून को और मजबूत बनाता है। इसमें परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामलों में जेल की अवधि और जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। साथ ही मामलों की समयबद्ध जांच अनिवार्य की गई है। इसके अलावा राज्यों को पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।

