चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के संकल्प को साकार करने वाले श्रम साधकों, कारीगरों और कलाकारों को नया बाजार उपलब्ध करवाने का एक सार्थक प्रयास है। इस मेले का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना और कारीगरों को उनके परिश्रम का उचित लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय उत्पादों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, तो कारीगरों को नए ग्राहक मिलेंगे और उनके काम को आगे बढ़ाने का उत्साह भी बढ़ेगा।

नायब सिंह सैनी ने मेले में आने वाले सभी आगंतुकों और पर्यटकों का स्वागत करते हुए उन्हें करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, विश्वकर्मा पूजन, गोवर्धन पूजन, भाई दूज और छठ पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित यह मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों के खानपान की विविधता को प्रदर्शित करेगा। यहां आने वाले परिवार देश की समृद्ध परंपराओं को करीब से जान सकेंगे और कारीगरों व शिल्पकारों के उत्पादों को खरीदने का अवसर भी प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आत्मनिर्भरता और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जनभागीदारी से जोड़ना आवश्यक है। इसमें गांव के कुम्हार, बुनकर, बढ़ई, छोटे दुकानदार और महिला उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सूरजकुंड का दिवाली मेला इसी भागीदारी को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
हरियाणा की धरती सूरजकुंड शिल्प मेले, कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और पिंजौर के आम उत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से देश-दुनिया के लोगों को जोड़ती रही है। ऐसे आयोजन स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर देते हैं। सूरजकुंड दिवाली मेला भी इसी सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करता है।