चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘वोट-चोरी’ भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है और मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) को रद्द करने की मांग करते हुए इस प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पंजाब विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा चुनाव आयोग की आड़ में अपने पक्ष में वोट जोड़कर और विपक्ष के वोट काटकर मतदाता सूचियों में हेराफेरी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव ‘वोट-चोरी’ के जरिए जीते गए थे।

मुख्यमंत्री ने इस बात की पुष्टि की कि देश उस चरण पर पहुंच चुका है, जहां कभी लोगों द्वारा चुनी गई भाजपा सरकार अब खुद यह तय कर रही है कि किसे वोट डालने का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि तानाशाही ने लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद पंजाब विधानसभा ने एस.आई.आर. के खिलाफ एक प्रस्ताव मौखिक मतदान से पारित किया, जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा घोषित ‘दमनशाही’ और नागरिकों के वोट के अधिकारों को खतरे के खिलाफ पंजाब के विरोध को दर्शाता है।
अपनी बात समाप्त करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से समानता, न्याय और संवैधानिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों की रक्षा की अपील की। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमें यह जिम्मेदारी बाबा साहेब अंबेडकर, आजादी के सेनानियों और हर आने वाली पीढ़ी के लिए निभानी है, जो विरासत में आजाद, समानता वाला और लोकतांत्रिक देश लेने की हकदार हैं।”