लुधियानाः पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विजिलेंस की टीम ने पीएसपीसीएल के पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक केडी चौधरी, पूर्व वरिष्ठ एक्सईएन संजीव प्रभाकर और कॉलोनाइजर अमित गर्ग को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार यह मामला 66 केवी बसंत एवेन्यू सब-स्टेशन की स्थापना से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में वर्ष 2021 में जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान दस्तावेजों, फाइलों और विभागीय मंजूरियों की गहन पड़ताल की गई। इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की।
फिलहाल विजिलेंस ब्यूरो तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे या नहीं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे हो सकते हैं। आरोप है कि कॉलोनाइजर ने पीएसपीसीएल अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपनी कॉलोनी में करीब 1015 वर्ग गज क्षेत्र में सब-स्टेशन स्थापित करवाया। जांच में सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा लुधियाना द्वारा लंबी जांच पूरी होने के बाद की गई।
विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि यदि उस समय संबंधित अधिकारियों द्वारा कॉलोनाइजर की सभी कॉलोनियों के एनओसी की सही तरीके से जांच की जाती और आपस में जुड़ी कॉलोनियों के कुल बिजली लोड को एक साथ जोड़ा जाता, तो पूरे 66 केवी सब-स्टेशन की लागत कॉलोनाइजर को स्वयं उठानी पड़ती। आरोप है कि ऐसा न करके निजी कॉलोनी को सीधा लाभ पहुंचाया गया। जांच में सामने आया कि बिजली मंत्रालय की ओर से सब-स्टेशन स्थापना को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
विजिलेंस के अनुसार प्रस्ताव में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी छिपाया गया कि बसंत एवेन्यू सब-स्टेशन पक्की सड़क से करीब तीन किलोमीटर दूर खेतों और अविकसित कॉलोनियों के बीच स्थित है। आज भी वहां तक पहुंचने के लिए उचित सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। विजिलेंस जांच के अनुसार तत्कालीन एक्सईएन संजीव प्रभाकर और अन्य फील्ड अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को तत्कालीन सीएमडी के.डी. चौधरी ने तमाम आपत्तियों और तकनीकी कमियों के बावजूद मंजूरी दे दी। इससे कॉलोनाइजर को बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचा।
