बब्बू मान, चीमा, गुरप्रीत घुग्गी, लैंबर सहित कई गायक हुए भावुक
जालंधर, ENS: दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले स्पीड रिकॉर्ड के मालिक दिनेश औलख के पुत्र दिवित औलख का मॉडल टाउन श्मशान घाट अंतिम संस्कार किया गया। जहां गायकों ने कंधा देकर दिवित औलख को अंतिम विदाई दी। इस दौरान पिता दिनेश औलख ने बेटे को मुखाअग्नि दी। वहीं गायक यो यो हनी सिंह भी भतीजे दिवित औलख को अंतिम विदाई देने शमशानघाट पहुंचे। लैंबर हुसैनपुरी ने भावुक पलों को याद करते हुए कहाकि बच्चे काफी छोटे थे और उस समय वह इंग्लैंड दौरे पर थे।
लैंबर ने कहाकि दिनेश औलख ने फोन करके बच्चों के लिए सामान मंगवाया था और वह 25 किलों का बैग बच्चों के लिए भरकर लेकर आए थे। इस दौरान दिनेश के बच्चों के प्रति प्यार को याद किया। उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह सरकार से अपील करते है कि ट्रैक्टर ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर ना होने से जो हादसा हुआ है, वह किसी ओर के साथ ना हो। ऐसे में इस हादसों से सबक लेकर सुधार करने की जरूरत है। गुरप्रीत घुग्गी ने भावुक होकर कहा कि फूलों जैसे बेटे-बेटियों के फूल गंगा में प्रवाह करने आसान नहीं है। ऐसे बच्चे खेलते हुए अच्छे लगते है, इन्हें कंधों पर उठाकर विदा करना सबसे बड़ा दुख है।
हम सभी ने अपने घरों में चले जाना है, लेकिन परिवार पर जो दुखों का पहाड़ टूटा है, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ जो हो रही है, यह वहीं परिवार जानता है। उन्होंने कहा कि कब तक सड़कों पर खून बहता रहेंगा। गाड़ियों पर क्यों नहीं रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे है। सड़कों हादसों को लेकर कब सिस्टम में सुधार दिखाई देंगा, परमात्मा को ही पता है कि ऐसे सड़क हादसों में कितनी जाने लोग गवांते रहेंगे।
सरबजीत सिंह चीमा ने कहा कि इतना बड़ा दुख कोई परिवार भी सहन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यंग बेटा को मां-बाप बड़े लाड प्यार से पालते है और वह कभी नहीं सोच सकते कि ऐसे बेटा दुनियां से चला जाएगा। परिवार की जितनी देर तक जिंदगी है, उन्हें एक-एक पल जीना काफी मुश्किल है।
बब्बू मान ने कहाकि वह 4 माह पहले भाई दिनेश औलख से मिले थे। इस दौरान भी वह बच्चे को लेकर बाते कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी सिस्टम पर वह कोई सवाल नहीं कर सकते। दरअसल, इस समय परिवार के आगे सिर्फ अंधेरा ही छाया हुआ है। ऐसे में सिस्टम को लेकर बाद में बात करेंगे।
मंगी माहल ने कहाकि जवान बेटे की शव पिता के कंधों पर जाना सही नहीं लगता। इस बच्चे को हाथों से खुद पाला है और खुद इन बच्चों की लोहड़ी के पर्व मनाए है। जिसके बाद मंगी माहल हाथों में खिलाए बच्चों को आज अंतिम विदाई देना दुखद घटना है। इस दौरान मंगा माहल खुद भी रोने लग गए।
बूटा मोहम्मद ने कहा कि यह जिंदगी की वह कमी है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। दरअसल, बच्चों के साथ लाईफ परिवार की बढ़ती है, लेकिन बच्चे के जाने से परिवार जिंदे जी मर जाता है। ऐसे में वह अरदास करते है कि दिवित को परमात्मा अपने चरणों में स्थान दें और परिवार को सहन शक्ति प्रदान करें।
