शिमलाः हिमाचल में शनिवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का समय सुबह का होने के कारण अधिकतर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक धरती हिलने और झटके महसूस होते ही लोग सहम गए और अपनी जान बचाने के लिए अफरा-तफरी में घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप शनिवार तड़के 4 बजकर 36 मिनट पर आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.1 मापी गई है। इसका असर शिमला के साथ-साथ प्रदेश के कई अन्य इलाकों में भी देखने को मिला।
सुबह-सुबह लगे भूकंप के झटके, घरों से बाहर निकले लोग
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तड़के आए इन झटकों से भले ही लोगों में दहशत फैल गई, लेकिन गनीमत यह रही कि अब तक कहीं से भी किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या मकानों में दरार आने की खबर नहीं मिली है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में भूकंप का लगातार आना लोगों को दहशत में डाल रहा है। पिछले कई सालों से यहां भूकम्प के झटके लग रहे हैं। प्रदेश भूकम्प की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन 4 और 5 में शामिल है। कुछ माह पहले भारतीय मानक ब्यूरो के नए भूकंपीय मानचित्र के अनुसार पूरे हिमाचल प्रदेश को भूकंप के सबसे खतरनाक जोन-6 में शामिल किया गया था।
लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इस नए जोन-6 मानक को रद्द कर पुराना सिस्मिक मानक फिर से लागू कर दिया है। नए भूकंप डिज़ाइन कोड के तहत पूरे हिमालयी क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश को सबसे ऊंचे जोखिम वाले जोन-6 में रखा गया था, जिससे पूरा राज्य अतिसंवेदनशील घोषित हुआ था। नए मानकों पर उठे सवालों और प्रशासनिक समीक्षा के बाद सरकार ने जोन-6 के नए नक्शे/मानक को रद्द कर दिया और पुराने भूकंपीय मानकों को ही दोबारा बहाल कर दिया है। पुराने मानकों के तहत हिमाचल जोन-4 और जोन-5 के संवेदनशील दायरे में आता है। वर्ष 1905 में कांगड़ा व चम्बा जिलों में आये विनाशकारी भूकंप से 10 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे।
