संतान प्राप्ति का आशीर्वाद पाने के लिए माता-पिता मांगते हैं मन्नत
अमृतसरः दुर्गियाना तीर्थ में विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू हो गया है। नवरात्रि के उत्सव के दौरान बजरंगबली के जयकारे गूंज रहे हैं। पवित्र शहर अमृतसर में ऐतिहासिक श्री दुर्गियाना तीर्थ परिसर के भीतर स्थित वड्डा हनुमान मंदिर में शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर 10 दिनों तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध ‘लंगूर मेला’ पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुआ है।
नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पारंपरिक पूजा के साथ-साथ, मंदिर में लंगूर के वेश में सजे बच्चों और उनके परिवारों की भारी भीड़ देखी गई। आस्था और प्राचीन परंपरा का यह अनूठा संगम हर साल देश-विदेश से भक्तों को आकर्षित करता है।
इस प्राचीन परंपरा के बारे में जानकारी देते मंदिर के मुख्य पुजारी शुभम शर्मा ने बताया कि इस जगह का इतिहास त्रेता युग और रामायण काल से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लव और कुश ने अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को पकड़ने के बाद संकटमोचन हनुमान जी को इसी बरगद के पेड़ से बांध दिया था। बाद में बंधन से मुक्त होने पर बजरंगबली ने इस स्थान को आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भक्त संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां आएंगे, उनकी इच्छाएं पूरी होंगी।
इस मान्यता के अनुसार जिन परिवारों की संतान प्राप्ति की प्रार्थनाएं पूरी होती हैं, वे नवरात्रि के त्योहार के दौरान अपने बच्चों को ‘लंगूर’ के वेश में भगवान हनुमान के चरणों में नमन करवाने के लिए लाते हैं। भक्तों का मानना है कि यह परंपरा कलयुग की शुरुआत से ही लगातार निभाई जा रही है।
पुजारी शुभम शर्मा और वरुण राणा एक भक्त जो अपने बच्चे को लंगूर के वेश में मंदिर लाए थे। उन्होंने बताया कि लंगूर का वेश धारण करने वाले बच्चों को नवरात्रि के पहले दिन से लेकर 10वें दिन तक कई कड़े धार्मिक नियमों का पालन करना होता है। इस दौरान बच्चे एक खास लाल पोशाक पहनते हैं और उनके पास घुंघरू, एक टोपी और एक डंडा होता है।
इन 10 दिनों के दौरान बच्चे ज़मीन पर सोते हैं, नंगे पैर रहते हैं और दिन में दो बार पूजा करने के लिए मंदिर जाते हैं। इसके अलावा, वे चाकू से कटा हुआ भोजन, साथ ही लहसुन, प्याज़ और तामसिक (अशुद्ध या उत्तेजक) भोजन से परहेज करते हैं। वरुण राणा ने कहा कि हालाँकि भगवान की भक्ति में तय नियमों का पालन करना ज़रूरी है, लेकिन भक्त हनुमान जी की कृपा से इस आध्यात्मिक साधना को सफलतापूर्वक पूरा करते हैं।
वड्डा हनुमान मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा ने नवरात्रि, वाल्मीकि जयंती और दशहरा की शुभकामनाएं देते कहा कि यह मंदिर अपने अनोखे धार्मिक महत्व और परंपराओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। उन्होंने बताया कि मंदिर में हनुमान जी की स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुई) मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में स्थापित है।
भक्त अनिल शर्मा ने कहा कि लंगूर मेला दुनिया भर में मशहूर है। जो माता-पिता बेटा या बेटी का आशीर्वाद पाने के लिए मन्नत मांगते हैं, वे मन्नत पूरी होने पर अपने बच्चों को ‘लंगूर’ के वेश में यहां दर्शन कराने लाते हैं। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा, रोशनी, पीने के पानी और कतार प्रबंधन के उचित इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो। अगले दस दिनों तक दुर्गियाना तीर्थ का पूरा माहौल भक्तिमय रहेगा और मंदिर परिसर जय श्री राम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठेगा।
