IndiGo Price Hike: त्योहारी सीजन और आने वाली छुट्टियों के बीच अगर आप हवाई यात्रा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको अब टिकट के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है। नए फ्यूल चार्ज 6 अक्टूबर से लागू किए गए हैं। एयरलाइन के मुताबिक, विमान ईंधन यानी एटीएफ की बढ़ती कीमत और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है।
एटीएफ की कीमत बढ़ने से बढ़ा एयरलाइन का खर्च
हवाई जहाज उड़ाने में सबसे बड़ा खर्च ईंधन का होता है। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में विमान ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 से 45 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में जब एटीएफ की कीमत बढ़ती है, तो एयरलाइंस का खर्च भी तेजी से बढ़ जाता है। इसी बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा अब यात्रियों से फ्यूल चार्ज के रूप में लिया जा रहा है।
अक्टूबर में एटीएफ के दाम में बड़ा इजाफा
तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर को विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में करीब 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद एटीएफ करीब 16 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया और इसकी कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। पिछले तीन महीनों से एटीएफ की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ी है और उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।
दूरी के हिसाब से लगेगा फ्यूल चार्ज
इंडिगो ने यात्रियों पर एक समान अतिरिक्त शुल्क लगाने के बजाय उड़ान की दूरी के आधार पर फ्यूल चार्ज तय किया है। यानी फ्लाइट जितनी लंबी दूरी की होगी, टिकट पर लगने वाला अतिरिक्त फ्यूल चार्ज भी उसी हिसाब से अलग हो सकता है। यह चार्ज घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू होगा। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो त्योहारी छुट्टियों में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले हैं।
दूसरी एयरलाइंस भी बढ़ा सकती हैं किराया
इंडिगो के बाद देश की दूसरी प्रमुख एयरलाइंस भी टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। एअर इंडिया समूह, एअर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां भी इसी तरह के लागत दबाव का सामना कर रही हैं। अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ये कंपनियां भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने या टिकट किराया महंगा करने का फैसला ले सकती हैं। हालांकि, हर एयरलाइन अपने खर्च और कारोबारी स्थिति के अनुसार अलग फैसला ले सकती है।
पश्चिम एशिया के तनाव का भी असर
हवाई किराए पर सिर्फ एटीएफ की बढ़ती कीमत का ही असर नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर विमान ईंधन की कीमत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि एयरलाइंस भविष्य में भी ईंधन लागत बढ़ने की आशंका को ध्यान में रख रही हैं।
विदेशी एयरलाइंस पर भी बढ़ा लागत का दबाव
यह समस्या सिर्फ भारतीय एयरलाइंस तक सीमित नहीं है। दुनिया की कई बड़ी विमानन कंपनियां भी ईंधन की बढ़ती लागत से प्रभावित हुई हैं। एमिरेट्स, सिंगापुर एयरलाइंस और लुफ्तहांसा जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी कुछ रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया है। इससे साफ है कि मौजूदा समय में महंगा विमान ईंधन दुनियाभर की एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर
त्योहारी सीजन में आमतौर पर हवाई यात्रा की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में अगर एयरलाइंस टिकट के साथ अतिरिक्त फ्यूल चार्ज भी वसूलती हैं, तो यात्रियों का कुल यात्रा खर्च बढ़ सकता है। खासकर लंबी दूरी की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा किराया देना पड़ सकता है।
आगे भी महंगे रह सकते हैं हवाई टिकट
अगर एटीएफ की कीमतों में आने वाले समय में भी बढ़ोतरी जारी रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता बनी रहती है, तो हवाई टिकट सस्ते होने की संभावना कम हो सकती है। फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग के बीच ईंधन की बढ़ी लागत का बोझ टिकट की कीमतों पर कितना पड़ता है।
