श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर की सियासत में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर खतरा मंडराने लगा है। नेशनल कांफ्रेंस के 25 नाराज विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को अपनी मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। शुक्रवार को श्रीनगर में दोनों नेताओं की नाराज विधायकों के साथ अहम बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अगर विधायकों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा दे सकते हैं।
नाराज विधायकों ने सरकार और पार्टी नेतृत्व के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। जिनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगमी को पद से हटाना, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी से सड़क निर्माण विभाग वापस लेना या उन्हें पद से हटाना और सरकार से जुड़े लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराना शामिल है।
पार्टी के भीतर असंतोष पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा है। नाराज विधायकों ने 30 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच पांच गोपनीय बैठकें की। इन बैठकों में अपनी मांगों को लेकर रणनीति तैयार की और पार्टी नेतृत्व के साथ बातचीत के विकल्पों पर चर्चा हुई। अब सभी की नजर शुक्रवार को होने वाली बैठक पर है। यदि बातचीत विफल रहती है तो जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
नेशनल कांफ्रेंस को पहले ही बड़ा झटका लग चुका है। श्रीनगर से सांसद आगा रूहुल्लाह मेहंदी ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद उन्होंने इसे अपनी आजादी का फैसला बताया था। उन्होंने कहा था कि वह एक शहीद की विरासत और पाक खून की नस्ल का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपनी आजादी के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। जिसके बाद वह सांसद नहीं रहे।
27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। नेशनल कांफ्रेंस के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को मंत्री बनाया गया था। वहीं निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। इस विस्तार में कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद नहीं मिल पाया। इनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल के नाम भी शामिल थे। बाद में फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को अली मोहम्मद सागर की जगह पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 95 सीटें हैं, जिनमें 90 निर्वाचित और 5 मनोनीत सीटें शामिल हैं। फिलहाल पांचों मनोनीत सीटें खाली हैं। मौजूदा सदन में बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। नेशनल कांफ्रेंस के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास फिलहाल 53 सीटें हैं।
यदि 25 विधायक इस्तीफा दे देते हैं और उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो गठबंधन की संख्या घटकर 28 रह जाएगी। वहीं, सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 65 हो जाएगी और बहुमत का आंकड़ा 33 पर पहुंच जाएगा। ऐसी स्थिति में उमर अब्दुल्ला सरकार बहुमत से पीछे रह जाएगी और उसके सामने सत्ता बचाने का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, सरकार का भविष्य विधायकों के इस्तीफे और विधानसभा में बदलते संख्या बल पर निर्भर करेगा।
