शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और इसकी सभ्यता, संस्कृति और समृद्ध ज्ञान परंपराओं का मूल आधार है। राज्यपाल आज कांगड़ा जिले के नूरपुर के निकट मल्कवाल स्थित के.बी.वी.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृत भारती संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर राज्यपाल ने संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया तथा संस्कृत भारती, आयोजनकर्ताओं और देशभर से आए प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथों ने हजारों वर्षों से भारत की ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, नैतिकता और मानवीय मूल्यों की परंपराओं को संरक्षित एवं समृद्ध किया है। उन्होंने संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने तथा इसे दैनिक संवाद की भाषा के रूप में प्रोत्साहित करने के लिए संस्कृत भारती द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं भाषाई विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की स्थानीय बोलियों पर संस्कृत का गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2019 से हिमाचल प्रदेश को देश के दूसरे संस्कृत भाषी राज्य का दर्जा प्राप्त है।
