अमृतसरः नशीले पदार्थों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, अमृतसर ग्रामीण पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में चेकपॉइंट बढ़ा दिए गए हैं। इसी सतर्कता के तहत, पुलिस ने ब्यास चेकपॉइंट पर एक ट्रक को रोका और उसमें से भारी मात्रा में इथेनॉल बरामद किया। आशंका है कि इस केमिकल का इस्तेमाल अवैध शराब बनाने के लिए किया जाना था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधितक करते हुए एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चहल ने बताया कि यह ग्रामीण पुलिस बल के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है। उन्होंने कहा कि डीजीपी गौरव यादव के निर्देशों के अनुसार, नशा तस्करों और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। गुप्त सूचना के आधार पर, पुलिस ने एसपी (डी) रमनदीप, डीएसपी बाबा बकाला सुखपाल, डीएसपी (डी) गुरिंदर नागरा, सीआईए स्टाफ इंचार्ज मनमीत और ब्यास पुलिस स्टेशन के एसएचओ मुख्तियार सिंह के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित कीं।
ब्यास में एक हाई-टेक चेकपॉइंट पर जांच के दौरान, हरियाणा की ओर से आ रहे एक ट्रक (रजिस्ट्रेशन नंबर PB 65 AU 3421) को रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें से लगभग 30,80,000 मिलीलीटर (3,080 लीटर) इथेनॉल बरामद हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, आबकारी विभाग (Excise Department) के अधिकारियों और एक इंस्पेक्टर को मौके पर बुलाया गया। कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और ब्यास पुलिस स्टेशन में आबकारी अधिनियम (Excise Act) के तहत एक FIR (संख्या 336/26) दर्ज की गई।
SSP चहल ने बताया कि इस केमिकल का इस्तेमाल लगभग 17,000 बोतल अवैध और जहरीली शराब बनाने के लिए किया जा सकता था। पुलिस के अनुसार, योजना यह थी कि त्योहारों के मौसम—खासकर दिवाली के आसपास—इस शराब को ग्रामीण इलाकों में गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों को कम कीमत पर बेचा जाए। पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए, SSP ने बताया कि 2020 और हाल के वर्षों में जहरीली (नकली) शराब पीने से कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर यह केमिकल गांवों तक पहुंच जाता, तो इसे गलत तरीके से मिलाने या अनियंत्रित इस्तेमाल से कोई बड़ा हादसा हो सकता था। पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई से एक बड़े जान-माल के नुकसान को टालने में मदद मिली।
पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ से पता चला है कि इस नेटवर्क के मुख्य सरगना मत्तेवाल का रहने वाला जितेंद्र और अमृतसर के गोल्डन गेट का रहने वाला राजू हैं। पुलिस ने इस मामले में राजविंदर सिंह और एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, ये दोनों ही नशे के आदी बताए जाते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि जितेंद्र ने कथित तौर पर यह केमिकल हरियाणा के करनाल इलाके से मंगवाया था, जिसके लिए वह हर ट्रिप के बदले लोगों को 4,000 रुपये देता था। यह भी पता चला है कि आरोपी पुलिस चेकपॉइंट्स की रेकी करने और ट्रकों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा) देने के लिए क्रेटा, इनोवा और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी जितेंद्र के खिलाफ पहले भी NDPS एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
SSP चहल ने बताया कि फिलहाल हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ करके इस गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। मुख्य आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस अवैध धंधे की पूरी सप्लाई चेन का पर्दाफाश करने की कोशिश की जाएगी।
