सोलनः बद्दी के एक उद्योग में सोमवार देर शाम अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कंपनी का एक फ्लोर पूरी तरह इसकी चपेट में आ गया। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। बद्दी से चार, नालागढ़ से एक तथा स्थानीय उद्योगों के दो फायर टेंडरों समेत करीब सात दमकल वाहनों की मदद ली गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, जबकि कंपनी को भारी नुकसान होने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार कंपनी में मुख्य रूप से पैकेजिंग का काम होता है और फॉयल में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। इसी हिस्से में आग लगने के बाद एक पूरा फ्लोर इसकी चपेट में आ गया। दमकल कर्मियों ने फोम का इस्तेमाल कर आग पर काबू पाया।
एसडीएम डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गई थी। करीब सात फायर टेंडरों को आग बुझाने के लिए लगाया गया। आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था और शेष हिस्से को भी नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि घटना में किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ है। कंपनी में हुए नुकसान का आकलन संबंधित विभागों की टीम द्वारा किया जाएगा।
हादसे के बाद उद्योगों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मौके पर कंपनी में प्रभावी फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि आग बुझाने के लिए कंपनी में केवल तीन-चार अग्निशमन सिलेंडर मौजूद थे। इनमें से कुछ सिलेंडरों पर वर्ष 2022 की तारीख अंकित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि समय पर इनकी रिफिलिंग और सर्विसिंग क्यों नहीं करवाई गई।
बीबीएन में लगातार औद्योगिक इकाइयों में आगजनी की घटनाओं के बीच फायर सेफ्टी मानकों की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। झाड़माजरी की परफ्यूम फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड के बाद भी यदि उद्योगों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है तो यह भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
अब प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने यह जांच का विषय है कि उद्योग को फायर सेफ्टी की एनओसी किन मानकों के आधार पर जारी की गई थी और मौके पर अग्निशमन व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
