धर्मशालाः हिमाचल की राजनीति में अपनी बेबाक शैली और लंबे राजनीतिक अनुभव के लिए पहचाने जाने वाले मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह निधन हो गया। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे मनकोटिया की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कांगड़ा स्थित सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
बताया जा रहा है कि सुबह घर पर उनकी तबीयत अचानक खराब हुई। इसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से उनके पैतृक गांव तियारा ले जाया जा रहा है। उनके निधन की खबर सामने आते ही कांगड़ा से लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक सहयोगियों, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।
राजनीति में आने से पहले मेजर विजय सिंह मनकोटिया भारतीय सेना में अधिकारी रहे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया और शाहपुर को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। मेजर मनकोटिया ने प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में भी काम किया। कांग्रेस सरकार के दौरान 1995 और 2003 में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। इसके अलावा वे हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे। प्रदेश की राजनीति में लंबे अनुभव और स्पष्ट एवं बेबाक बोलने की शैली के चलते उनकी अलग पहचान बनी रही। करीब चार साल पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। हालांकि सक्रिय चुनावी राजनीति में उनकी वापसी नहीं हो सकी।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। उनका बेटा अमेरिका में रहता है, जबकि बेटी भी विदेश में रहती है। परिवार के अनुसार दोनों बच्चों के विदेश से लौटने के बाद ही अंतिम संस्कार की तारीख और समय तय किया जाएगा। मेजर मनकोटिया के निधन के साथ हिमाचल की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिसने सेना की वर्दी से लेकर विधानसभा और प्रदेश सरकार तक का लंबा सफर तय किया। शाहपुर की राजनीति में उनका नाम लंबे समय तक याद किया जाएगा।