नई दिल्लीः कनाडा सरकार ने पीआर पाने वाले लोगों को लेकर 2026 में अपनी इमीग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, सरकार ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही है, जो देश की अर्थव्यवस्था में तुरंत योगदान दे सकें। ऐसे में कनाडा की नई नीति के अनुसार, जो लोग पहले से कनाडा में रहकर काम कर रहे हैं और अच्छी सैलरी (करीब 70 लाख रुपये सालाना) कमा रहे हैं, उन्हें PR (परमानेंट रेजिडेंसी) जल्दी मिल सकती है। वहीं अवैध तरीके से आने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जाएगा। सरकार ने ‘हाई-वेज ऑक्यूपेशन’ फैक्टर वाले नए प्लान को लाने का संकेत दिया था, लेकिन अब इसे समय से पहले लागू किया जा सकता है। कनाडाई सरकार एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम में बदलाव करना चाहती है। इसमें तीन तरह के प्रोग्राम हैं, जिनके जरिए स्किल विदेशी वर्कर्स को PR दिया जाता है। फिलहाल एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम में बदलाव होने में 12 से 18 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद ही ज्यादा सैलरी के आधार पर PR देने वाला नियम लागू हो सकता है। IRCC के अधिकारियों ने एक बैठक की, जिसमें PR को लेकर ये अहम जानकारी सामने आई है। इसमें बताया गया कि CRS में बदलाव मंत्रिस्तरीय निर्देशों के जरिए होंगे, जबकि प्रोग्राम के बड़े बदलावों के लिए कानूनी संशोधन की जरूरत पड़ेगी। IRCC चाहती है कि ये नया फैक्टर जल्दी लागू हो जाए, ताकि दुनियाभर से टैलेंटेड लोग देश में बस सकें। कनाडा का वर्क एक्सपीरियंस और जॉब ऑफर रखने वाले वर्कर्स को ज्यादा CRS प्वाइंट्स मिलेंगे, अगर उनकी सैलरी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। CRS प्वाइंट्स तीन स्तरों में मिलेंगे, जो इस बात पर निर्भर होगा सैलरी औसत से कितनी अधिक है। IRCC ने साफ किया है कि प्वाइंट्स वर्कर की व्यक्तिगत सैलरी पर नहीं, बल्कि उस व्यवसाय (NOC कोड) के लिए जॉब बैंक द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड सैलरी पर आधारित होंगे।
एक्सप्रेस एंट्री में हो रहे इस बदलाव का सीधा असर आईटी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग सेक्टर में काम कर रहे भारतीय वर्कर्स पर होगा। इन सेक्टर्स में भारतीयों का दबदबा है और यहां औसत से ज्यादा सैलरी भी मिलती है। इसका मतलब है कि भारतीय वर्कर्स को एक्स्ट्रा CRS प्वाइंट्स मिलेंगे और उनके जल्दी PR पाने की संभावना रहेगी। कनाडा में लंबे वक्त से काम कर रहे भारतीय वर्कर्स को भी नए प्लान की वजह से लाभ मिलने वाला है। हालांकि, इस नियम का सबसे खराब असर भारतीय छात्रों पर पड़ेगा।
अभी तक सरकार किसी भी तरह की पढ़ाई करने पर CRS प्वाइंट्स देती आई है, लेकिन जल्द ही सिर्फ मास्टर्स या पीएचडी की पढ़ाई के लिए एक्स्ट्रा प्वाइंट्स देने की व्यवस्था की जा सकती है। अगर किसी ने यहां पर छोटा डिप्लोमा किया है, तो उसे PR के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
