चंडीगढ़ः पंजाब की राजनीति में इन दिनों पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ का चर्चा में चल रहा है। हालांकि दिलजीत ने अभी तक राजनीति में आने का कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन इसके बावजूद कई सामाजिक संगठनों और युवाओं के बीच उन्हें एक संभावित राजनीतिक चेहरा माना जाने लगा है। दरअसल, पिछले दिनों दिलजीत दोसांझ ने सिख मुद्दों, पंजाबी प्रवासियों और कनाडा में खालिस्तान झंडों को लेकर जो संतुलित दृष्टिकोण अपनाया, उससे उन्हें परंपरागत राजनीति से अलग पहचान मिली है। वहीं सोशल मीडिया के जरिए राजनीति में आने को लेकर दिलजीत साफ कर चुके हैं कि उनका काम मनोरंजन करना है, राजनीति नहीं। इसके बावजूद पंजाब में यह चर्चा लगातार बढ़ रही है कि आने वाले समय में यदि वह राजनीति में कदम रखते हैं, तो वे पारंपरिक नेताओं के लिए चुनौती बन सकते हैं।
पंजाब के सामाजिक संगठन ‘जागो पंजाब मंच’ ने तो जनता से सीधे ही उन्हें राजनीति में आने का आग्रह तक कर दिया है। संगठन का कहना है कि पंजाब आर्थिक संकट, नशे और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है और लोगों का मौजूदा राजनीतिक पार्टियों से भरोसा कमजोर हुआ है। ऐसे में जनता किसी नए और साफ-सुथरे चेहरे की खोज में है। दिलजीत की सबसे बड़ी ताकत उनके गैर-राजनीतिक नजरिए को माना जा रहा है। उन्होंने कभी भी अपने आप को किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जोड़ा। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का समर्थन जरूर किया था, लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में बयान देने से बचते रहे। यही कारण है कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग भी उन्हें पसंद करते हैं।
हाल ही में कनाडा में हुए एक प्रोग्राम के दौरान दिलजीत ने खालिस्तान झंडों पर आपत्ति जताई थी। इसके साथ ही उन्होंने पंजाबी सिख प्रवासियों की मेहनत और संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि आज पंजाबी दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके इस बयान को पंजाब में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। दिलजीत दोसांझ की लोकप्रियता सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर उनकी सादगी, देसी अंदाज़ और पंजाबी संस्कृति से जुड़ाव उन्हें युवाओं में खास बनाता है। मेट गाला जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पंजाबी पहचान को प्रमुखता से दिखाने के बाद भी उनका अक्सर जमीन से जुड़े कलाकार वाला अंदाज़ रहता है। फिलहाल, राजनीति में आए बिना ही दिलजीत पंजाब की राजनीतिक बहस का बड़ा चेहरा बन चुके हैं।
