अमृतसरः नशों और गैर-कानूनी प्रवास के मुद्दे पर दल खालसा ने केंद्र सरकार को घेरा है। दल खालसा के कार्यकारी अध्यक्ष परमजीत सिंह मंड ने आरोप लगाया कि लंबे समय से नशे का मुद्दा राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावों के दौरान वोट हासिल करने का साधन बन गया है, लेकिन इस समस्या का स्थायी हल नहीं निकाला जा सका है। इन मुद्दों पर अगली रणनीति तैयार करने के लिए जत्थेबंदी ने 1 नवंबर को पंजाब दिवस के मौके पर चंडीगढ़ के किसान भवन में ‘पंजाब, पंजाबियों का और पंजाबी के लिए’ शीर्षक के तहत कन्वेंशन करवाने का ऐलान किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परमजीत सिंह मंड ने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का हवाला देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे और नशे के मामलों में सीबीआई जांच पर मंड ने इसे राजनीतिक दिखावा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के नेटवर्क को चलाने वाले बड़े लोगों तक पहुंचने के बजाय नीचे स्तर पर कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में दूसरे राज्यों में हो रहे गैर-कानूनी प्रवास का मुद्दा भी उठाया।
मंड ने दावा किया कि इस कारण सरकारी जमीनों पर कब्जे, तंबाकू संस्कृति और अपराधों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। मंड ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से जुड़े विवादों की जांच भी किसी सरकारी एजेंसी की बजाय निष्पक्ष सिख जजों या विद्वानों के पैनल से करवाने की मांग की। मंड ने कहा कि पंजाब के भविष्य से जुड़े इन मुद्दों के हल के लिए लोगों और विभिन्न जत्थेबंदियों को एकजुट करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को होने वाली कन्वेंशन के दौरान इन मुद्दों पर विचार-विनिमय करने के बाद अगले संघर्ष के लिए ठोस एक्शन प्रोग्राम का ऐलान किया जाएगा।
