अमृतसरः अमृतसर में भंडारी पुल पर विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों के नेताओं ने पंजाब सरकार को निशाने पर लिया और राज्य में नशे की समस्या तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, और उनकी हत्या ने नशा-विरोधी अभियानों से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे नेताओं को हिरासत में भी लिया है।
साझा एक्शन फ्रंट पंजाब से जुड़े निहंग सिंह नेता जोगा सिंह वडाला ने कहा कि आज पूरे पंजाब में शोक का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या नशे के कारोबार से जुड़े लोगों ने की है। उनके अनुसार, इससे पहले मुख्यमंत्री और डीजीपी को एक ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें नशे के खिलाफ लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।
इस बीच भारतीय मूल निवासी मुक्ति मोर्चा और मिशन एकता पंजाब के युवा विंग के अध्यक्ष अमन वाल्मीकि ने कहा कि झोटा नशे को खत्म करने के लिए लड़ रहे थे। उन्होंने मांग की कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में शामिल लोगों के हथियारों के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस नशे की समस्या के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो ये संगठन सड़कों पर उतरकर अपने संघर्ष को और तेज करेंगे।
अकाली दल अमृतसर और वारिस पंजाब दे से जुड़े नेता राज कौर ने भी पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच अमृतसर के DCP जुगराज सिंह ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों की भावनाओं को देखते पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की और उन्होंने भी पूरा सहयोग दिया।
DCP के अनुसार शहर में यातायात सामान्य हो गया है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। झोटा की हत्या के बाद कई संगठन लगातार यह मांग कर रहे है कि नशीले पदार्थों की समस्या के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब यह देखना होगा कि इन मांगों के जवाब में सरकार और पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।
