यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के समय में भी इस प्रकार की कुप्रथा हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रही है। शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं। संस्थान प्रबंधन द्वारा आरोपी छात्र को निष्कासित करना तथा पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन एबीवीपी का मानना है कि केवल प्रारंभिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
यह आवश्यक है कि पूरे मामले की गहराई से, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की जाए, ताकि सभी दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अभी ठाकुर ने कहा कि “रैगिंग जैसी अमानवीय कुप्रथा के लिए किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह केवल एक अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है।
एबीवीपी ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की पुरजोर मांग करती है।” उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानो में एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में सक्रिय एंटी-रैगिंग समितियों का गठन, नियमित निगरानी, और छात्रों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, नवप्रवेशी छात्रों को एक सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करना सभी शैक्षणिक संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि एबीवीपी प्रशासन से मांग करती है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।
