बिना लाइसेंस नहीं बेच सकेंगे पटाखे, दुकानों के बीच तीन मीटर और संरक्षित स्थल से 50 मीटर की दूरी जरूरी
ऊना,सुशील पंडित: दीपावली पर जनसुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला दंडाधिकारी जतिन लाल ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जिला ऊना में दीपावली के अवसर पर केवल ग्रीन पटाखों का ही भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल किया जा सकेगा। पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थान पर दुकान लगाने हेतु संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट से लाइसेंस लेना और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
एसडीएम निर्धारित करेंगे बिक्री स्थल
जिला मजिस्ट्रेट ने सभी उपमंडल मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) को अपने-अपने क्षेत्र में ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थान अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। बिक्री स्थलों पर संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं, मानक संचालन प्रक्रियाओं और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन करना होगा। संबंधित एसडीएम को अपने क्षेत्र में निर्धारित परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
बिना लाइसेंस नहीं होगी बिक्री
आदेश के अनुसार, संबंधित एसडीएम से लाइसेंस प्राप्त किए बिना कोई भी व्यक्ति ग्रीन पटाखों का भंडारण और बिक्री नहीं कर सकेगा। अस्थायी लाइसेंस के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सेवाओं के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है।
दुकानों के लिए निर्धारित किए सुरक्षा मानक
ग्रीन पटाखों को गैर-ज्वलनशील सामग्री से बने बंद और सुरक्षित शेड में रखना होगा, ताकि अनधिकृत व्यक्ति वहां तक न पहुंच सकें। बिक्री और भंडारण के लिए बनाए गए शेड एक-दूसरे से कम से कम तीन मीटर तथा किसी भी संरक्षित स्थल से कम से कम 50 मीटर की दूरी पर होने चाहिए। शेड एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं होने चाहिए।
शेड के भीतर या उनकी निर्धारित सुरक्षा दूरी के भीतर तेल अथवा गैस से जलने वाले लैंप और खुली लौ का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। बिजली की लाइटें दीवार या छत पर स्थायी रूप से लगानी होंगी और उन्हें लचीले तार से लटकाकर नहीं लगाया जा सकेगा। प्रत्येक दुकान के स्विच दीवार पर मजबूती से लगाने होंगे तथा शेड की प्रत्येक कतार के लिए एक मास्टर स्विच की व्यवस्था करनी होगी।
एक समूह में अधिकतम 50 दुकानें ही लगाई जा सकेंगी। प्रत्येक दुकान या स्टॉल में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पानी रखना अनिवार्य होगा।
छह मीटर चौड़ी बाधारहित सड़क जरूरी
पटाखों की दुकानें कम से कम छह मीटर चौड़ी बाधारहित मोटर योग्य सड़क के किनारे होनी चाहिए। सड़क की चौड़ाई की गणना में बिजली के खंभे, सड़क की पटरी, ढकी नालियां, खंभेनुमा संरचनाएं और ऊंचे फुटपाथ जैसी बाधाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। दुकानों का प्रवेश और निकास सड़क की ओर होना चाहिए, ताकि अग्निशमन वाहनों को पहुंचने में परेशानी न हो। बिक्री के लिए स्थान अधिसूचित करने से पहले स्थानीय अग्निशमन अधिकारी से परामर्श लेकर उपयुक्त स्थल का चयन करना होगा।
पटाखों के सुरक्षित भंडारण के निर्देश
ग्रीन पटाखों को सामान प्रदर्शित करने वाली दुकान की खिड़की में नहीं रखा जा सकेगा। दुकान में इन्हें स्पार्क-प्रूफ पात्र में अथवा उनके मूल बाहरी पैकेट में रखना होगा। मूल पैकेट प्रभावी रूप से सीलबंद और अच्छी स्थिति में होना चाहिए। पटाखों से भरे पात्र या पैकेट को दुकान में ग्राहकों की आवाजाही से दूर तथा ज्वलनशील या दहनशील सामग्री से अलग रखना होगा। बिक्री के लिए पैकेट खोले जाने पर पटाखों को तुरंत साफ, धूल-मुक्त और स्पार्क-प्रूफ पात्र में रखना अनिवार्य होगा।
रात 8 से 10 बजे तक ही चला सकेंगे पटाखे
जिला दंडाधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय के 23 अक्तूबर, 2018 के फैसले और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के संबंधित आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार, दीपावली और गुरुपर्व जैसे त्योहारों पर रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे। क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या पर पटाखे चलाने की अनुमति रात 11 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक होगी।
संबंधित एसडीएम, डीएसपी और थाना प्रभारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पटाखे केवल निर्धारित समय और निर्धारित स्थानों पर ही चलाए जाएं तथा प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री न हो। आदेश में कहा गया है कि उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित पुलिस थाने के थाना प्रभारी (एसएचओ) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी तय होगी। ऐसे उल्लंघन के संबंध में न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
पटाखों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता अभियान
जतिन लाल ने सरकारी विभागों, स्कूलों तथा कॉलेजों को पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।
