जालंधर, ENS: विजीलेंस ब्यूरो ने तहसील में बीते दिन ट्रैप लगाकर पटवारी और उसके साथी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जहां पटवारी विश्वजीत सिंह और निजी एजेंट राकेश कुमार उर्फ सोनू को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू किया गया था। वहीं इस कार्रवाई के बाद आज पटवारखाने में सन्नाटा पसर गया। इसकी तस्वीरें भी सामने आई है, जिसमें देखा जा सकता है कि पटवारखाने में पहली मंजिल में किसी भी पटवारी का दफ्तर नहीं खुला है। सभी दफ्तरों के दरवाजों पर ताले लगे हुए है। बता दें कि बीते दिन विजिलेंस के प्रवक्ता ने बताया था कि आरोपियों को न्यू राजन नगर, जालंधर के एक निवासी द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने 4 मरले का एक प्लॉट खरीदा था और इसकी सेल डीड 23 दिसंबर 2024 को अपने छोटे भाई उमेश कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड करवाई थी। उसने प्लॉट के इंतकाल के लिए संबंधित पटवारी से संपर्क किया, लेकिन मामले में बार-बार देरी की गई। दिनांक 7 अक्टूबर 2026 को वह प्लॉट के इंतकाल के लिए दोबारा आरोपी पटवारी विश्वदीप सिंह के पास गया। आरोपी पटवारी ने उसे अपने निजी एजेंट राकेश कुमार उर्फ सोनू से मिलने के लिए कहा, जिसने राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का इंतकाल दर्ज करवाने के बदले 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की। मजबूरन, शिकायतकर्ता ने शुरू में 1,500 रुपये दिए, लेकिन आरोपी राकेश कुमार ने वह राशि वापस कर दी और उसे अगले दिन पूरे 5,000 रुपये लाने के लिए कहा।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि रिश्वत की मांग के संबंध में हुई बातचीत शिकायतकर्ता द्वारा रिकॉर्ड कर ली गई थी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने विजीलेंस ब्यूरो रेंज जालंधर से संपर्क किया। उसकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विजीलेंस टीम ने एक जाल बिछाया, जिसके दौरान दोनों आरोपियों पटवारी और निजी एजेंट को दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू कर लिया गया। इस संबंधी दोनों आरोपियों के खिलाफ विजीलेंस ब्यूरो के थाना जालंधर में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया और मामले की आगे की जांच जारी है।
