जालंधर (ENS): महानगर के श्रीराम चौक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर Dog lovers ने विरोध प्रदर्शन किया गया। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए रेबीज और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को, जो इंसानी जीवन के लिए खतरनाक हैं, उन्हें मारने के निर्देश दिए थे। जिसको लेकर श्रीराम चौक पर डॉग लवर्सों ने एकत्रित होकर सुप्रीम कोर्ट के फैसला का विरोध जताते हुए कहा कि आवारा कुत्तो को सार्वजनिक स्थानों से हटाने व उन्हें मारने का आदेश बहुत कठोर है और इससे कुत्तों के अधिकारों का हनन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट से यही विनती है कि इस फैसले को वापस लिया जाए।
पीड़ित बुजुर्ग ने डॉग लवर्स का जताया विरोध
वहीं, इस दौरान एक पीड़ित बुजुर्ग ने प्रदर्शन कर रहे लोगों का विरोध जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। इसे लागू किया जाना चाहिए। मुझे पांच बार आवारों कुत्तों ने काटा है। इस फैसले से काफी लोगों को राहत मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ये सुनाया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से लंबे समय तक ठोस प्रयास नहीं किए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि एनिमल बर्थ कंट्रोल व्यवस्था ठीक से लागू नहीं की गई है और इसके लिए फंडिंग भी अपर्याप्त और असमान है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि लोग कुत्तों के हमलों और खतरे के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकें।’
गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए रेबीज और गंभीर रूप से बीमार कुत्ते इंसानी जीवन के लिए खतरनाक हैं, उन्हें मारने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वह जमीनी हकीकत से आंखें नहीं मूंद सकती, जहां बच्चे, यात्री और बुजुर्ग लगातार डॉग बाइट की घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए मिलजुलकर प्रयास करते हुए जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करें।
अदालत ने कहा ‘पशु जन्म नियंत्रण नियमों और अन्य लागू वैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार लाइलाज बीमारी से ग्रस्त, रेबीज से संक्रमित और किसी भी तरह से मानव जीवन के लिए खतरनाक कुत्तों को मारने के उपाय अधिकारी कर सकते हैं।’
