नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव अब और तेज हो रहा है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने देश की कंपनियों की अमेरिका प्रतिबंधों का पालन न करने का आदेश दिया है। यह कदम खासतौर पर उन चीनी के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने देश की कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का आदेश दिया है। यह कदम खासतौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को बचाने के लिए उठाया गया है। जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है।
चीन का ब्लॉकिंग स्टैच्यू लागू
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने से रोक दिया है। यह पहली बार है जब चीन ने अपने ब्लॉकिंग स्टैच्यू यानी ऐसा कानूनी हथियार इस्तेमाल किया है जो विदेशी कानूनों के असर को अपने देश में निष्प्रभावी करने के लिए बनाया गया है। इस कदम को सिर्फ कूटनीतिक विरोध से आगे बढ़ाकर कानूनी जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
हेंगली पेट्रोकेमिकल पर पहली भी हुई कार्रवाई
इससे पहले OFAC ने हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी पर भी प्रतिबंध लगाया था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कंपनी ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदती रही है। ईरान की तेल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए चीन का फैसला
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह ब्लॉकिंग आदेश विदेशी कानूनों के दायरे से अपने देश को बचाने, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा करने और चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए जारी किया गया है। चीन ने दोहराया कि वह ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का सख्त विरोध करता है। जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी नहीं मिली है और जो अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर नहीं है।
