नई दिल्लीः अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में भारत से तस्करी किए गए कुल 657 पुरानी कलाकृतियों को वापस कर दिया गया। इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 मिलियन डॉलर बताई जा रही है। मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस की ओर से इसे लौटाया गया। ये कलाकृतियां पुरानी चीजों के तस्कर सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की चल रही जांच के दौरान बरामद की गई थी। जिला अटॉर्नी कार्यालय ने 2012 में कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नवंबर 2019 में उसे और उसके सात सह-आरोपियों को चोरी की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी की साजिश के आरोप में अभियुक्त बनाया गया। कपूर का भारत से प्रत्यर्पण अभी लंबित है, जहां उसे 2022 में तस्करी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया था। उसके 5 सह-आरोपियों को मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय पहले ही दोषी ठहरा चुका है। सांस्कृतिक संपत्ति से जुड़े अपराधों में 18 लोगों को दोषी भी ठहराया है, जबकि 7 अन्य लोगों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अभी चल रही है।
एक आधिकारिक बयान में, डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने कहा कि, इन चीजों की वापसी से उन तस्करी नेटवर्क के विशाल पैमाने का पता चलता है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाया था। इन वस्तुओं को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत को सौंपा गया। एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट अब तक 6,200 से अधिक सांस्कृतिक धरोहरें बरामद कर चुकी हैं, जिनमें दुर्लभ पुस्तकें, कलाकृतियां, मूर्तियां और प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं। इनकी कुल कीमत 48.5 करोड़ डॉलर से अधिक है। इनमें से 5,900 से अधिक वस्तुएं अब तक 36 देशों को लौटाई जा चुकी हैं।
मिली जानकारी के अनुसार लौटाई गई वस्तुओं में ‘अवलोकितेश्वर’ की लगभग 20 लाख डॉलर मूल्य की कांस्य प्रतिमा भी शामिल है, जो शेरों से सजे सिंहासन पर द्वि-कमल आसन पर विराजमान है। इस पर अंकित शिलालेख में कारीगर का नाम द्रोणादित्य बताया गया है, जो छत्तीसगढ़ के वर्तमान रायपुर के पास स्थित सीपुर का निवासी था। यह अवलोकितेश्वर प्रतिमा 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिली कांस्य प्रतिमाओं के एक बड़े भंडार का हिस्सा थी और 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के संग्रह में शामिल हो गई थी। विजय कुमार ने कहा, “अभी 1,000 से ज्यादा कलाकृतियां वापस लाई जानी बाकी हैं; हमें उम्मीद है कि भारत और HSI मिलकर इस दिशा में काम करेंगे, और साथ ही कपूर तथा वीनर से जुड़ी उन फाइलों (dossiers) को भी खंगालते रहेंगे, जिनमें लगभग 50 साल की लूट का ब्योरा दर्ज है।”
