चंडीगढ़ : न्याय व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (पुलसा) द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा के दूरदर्शी नेतृत्व और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल की निगरानी में सांकेतिक भाषा के दुभाषियों के लिए 40 घंटे का एक विशेष ‘मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम’ आयोजित किया गया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सदस्य सचिव अरुण कुमार अग्रवाल ने बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ‘मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति’ (एमसीपीसी) के वरिष्ठ प्रशिक्षकों स्वर्ण संधीर और मोनिका जलोटा द्वारा पंजाब के 12 जिलों के सांकेतिक भाषा दुभाषियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों के लिए ‘वैकल्पिक विवाद निवारण’ (एडीआर) प्रणाली तक निर्बाध और समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
भविष्य की योजना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलसा द्वारा पंजाब की सभी ‘जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों’ (डीएलएसए) में मध्यस्थता की कार्यवाही और अन्य वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रियाओं के दौरान प्रमाणित सांकेतिक भाषा के दुभाषियों की उपलब्धता को स्थायी व्यवस्था के रूप में लागू करने की योजना बनाई गई है।
