अमृतसरः शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आनंदपुर साहिब मामले की जांच के लिए बनी सब-कमेटी की शुरुआती रिपोर्ट जारी करते हुए संस्था के खिलाफ फैलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण प्रचार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि इस मामले की गहन जांच के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी, जिसमें बलदेव सिंह कालियानपुर, गुरमीत सिंह बुह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला और गुरबख्श सिंह खालसा शामिल थे और सचिव बलविंदर सिंह कहलवान इसके को-ऑर्डिनेटर थे। जांच कमेटी ने तय 15 दिनों के समय में अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एडवोकेट धामी ने कहा कि जहां आपराधिक मामलों में जांच और कार्यवाही कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के तहत होती है। वहीं इस मामले में शिरोमणि कमेटी की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के रोज नए आरोप गढ़े जा रहे हैं ताकि ऐसा दिखाया जा सके कि शिरोमणि कमेटी में कोई गड़बड़ी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि किस अधिकार के तहत मीडिया के सामने जांच की अधूरी जानकारी पेश करके भ्रम फैलाने की इजाजत दी जा रही है।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष ने पूरे मामले की CBI जांच की अपनी मांग दोहराई। पंजाब के पिछले हालात और शहीद भाई जसवंत सिंह खालरा के मामले का जिक्र करते कहा कि जब भी राज्य में गंभीर मुद्दे उठे हैं, सच्चाई CBI जांच से ही सामने आई है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी जैसी सिख संस्था को निशाना बनाकर उसे कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों साथ ही फंड के गलत इस्तेमाल या विदेश में पैसा भेजने के दावों को पूरी तरह खारिज करते उन्होंने साफ किया कि शिरोमणि कमेटी के धार्मिक प्रचार और चैरिटी फंड का एक-एक पैसा पूरी पारदर्शिता और सही रिकॉर्ड-कीपिंग के साथ खर्च किया जाता है।
रिकॉर्ड से तथ्यों का ब्योरा देते एडवोकेट धामी ने बताया कि संबंधित महिला के तख्त श्री केसगढ़ साहिब (कमरा नंबर 38), गुरुद्वारा अंब साहिब और श्री दरबार साहिब (गुरु अर्जन देव निवास) में अलग-अलग तारीखों पर ठहरने के बारे में आधिकारिक एंट्री, रसीदें और किराया भुगतान के रिकॉर्ड मौजूद हैं। ये रिकॉर्ड साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि महिला के लगातार छह महीने तक एक ही सराय (यात्री निवास) में ठहरने का दावा पूरी तरह झूठा है और यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
जांच रिपोर्ट में सराय के रजिस्टरों में की बड़ी छेड़छाड़ का खुलासा करते एडवोकेट धामी ने रजिस्टर दिखाए और बताया कि एंट्री नंबर 246 के बाद की एंट्री को काट दिया गया था और मनगढ़ंत लाइनें जोड़ने के लिए आंकड़ों में बदलाव किया गया था। एक झूठा लिंक बनाने के लिए एंट्री नंबर 247 से लेकर 281 तक की एंट्री के साथ छेड़छाड़ की जिसमें खुद एंट्री नंबर 247 में बदलाव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि हैंडराइटिंग एनालिसिस से भी पुष्टि हुई है कि ये एंट्री बाद में जबरदस्ती जोड़ी गई थीं। SGPC अध्यक्ष ने कहा कि संगठन जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और संगत के सामने सच्चाई लाने के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।
