टेक्नोलॉजी: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिंजेस यानी की एआई हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। अब चाहे ईमेल लिखना हो, किसी प्रोजेक्ट के लिए आईडिया चाहिए हो या फिर होमवर्क में मदद लेनी हो लोग तुरंत एआई चैटबॉट्स का सहारा लेने लगे हैं। ChatGPT, Claude और Gemini जैसे टूल्स कुछ ही सैकेंड में जवाब दे देते हैं जिससे समय और मेहनत दोनों बचते हैं
लेकिन एक नई रिसर्च ने इस सुविधा के पीछे छिपे एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। स्टडी के अनुसार, सिर्फ एक मिनट तक एआई पर निर्भर रहने से इंसान की खुद सोचने और समस्याएं हल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
रिसर्च में आया सामने
यह रिसर्च 1,222 लोगों पर किए गए तीन बड़े एक्सपेरिमेंट्स पर आधारित थी। इसमें प्रतिभागियों का मैथ्स और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल किए गए हैं। कुछ लोगों को एआई की मदद लेने की अनुमति थी जबकि बाकी प्रतिभागियों को बिना किसी एआई सपोर्ट के सवाल हल करने थे। जिन लोगों ने एआई का इस्तेमाल किया।
उन्होंने शुरुआत में बेहतर प्रदर्शन किया है। उनके जवाब तेजी से आए और स्कोर भी ज्यादा रहे लेकिन असली फर्क तब दिखा जब रिसर्चर्स ने एआई एक्सेस हटा दिया। एआई की मदद लेने वाली प्रतिभागियों का प्रदर्शन अचानक कमजोर पड़ गया। मैथ्स टेस्ट में बिना एआई वाले लोगों ने लगभग 73 प्रतिशत सवाल सही हल किए जबकि एआई पर निर्भर रहने वाले लोग सिर्फ 57 प्रतिशत तक ही पहुंच पाए। पढ़ने समझने वाले टेस्ट में भी यही पैटर्न देखने को मिला है।
सोचने की आदत पर पड़ा असर
रिसर्चर्स के अनुसार, असली चिंता सिर्फ कम स्कोर नहीं है। एआई इस्तेमाल करने वाले लोग कठिन सवालों को जल्दी छोड़ने लगे यानी उनकी Persistence यानी लगातार कोशिश करने की क्षमता कमजोर होने लगी है। स्टडी में कहा गया कि सिर्फ लगभग 10 मिनट तक एआई से मदद लेने के बाद लोग बिना एआई के ज्यादा जल्दी हार मानने लगे। रिसर्चर्स ने इसे Boiling Frog Effect जैसा बताया मतलब शुरुआत में असर छोटा लगता है लेकिन धीरे-धीरे इंसान की गहराई से सोचने और खुद मेहनत करने की आदत कम हो सकती है।
हर तरह का AI इस्तेमाल नुकसानदायक नहीं
रिसर्च में एक दिलचस्प बात भी सामने आई है। इन लोगों ने एआई से सीधे जवाब मांगे। उनमें सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई परंतु उन्होंने एआई इस्तेमाल सिर्फ हिंट, गाइडेंस या समझाने के लिए किया गया है। उन पर नेगेटिव असर कम था। ऐसे में यदि एआई को टीचर की तरह इस्तेमाल किया जाए तो वह सीखने में मदद कर सकता है परंतु यदि हर काम का सीधा जवाब एआई से लिया जाए तो दिमाग धीरे-धीरे शॉर्टकट्स का आदी बन सकता है।
हमारी आदत है
इस स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि एआई खुद दुश्मन नहीं है। खतरा तब शुरु होता है जब इंसान हर छोटी के लिए उस पर पूरी तरह निर्भर होने लगता है। एआई समय बचा सकता है, काम आसान बना सकता है और नई चीजें सिखा सकता है परंतु यदि हम खुद सोचने और संघर्ष करने की आदत छोड़ देंगे तो लंबे समय में इसका असर हमारी मानसिक क्षमता पर असर पड़ेगा।
