धर्म: शरद पूर्णिमा वाले दिन रात को चंद्रमा की रोशनी के नीचे खीर रखने की परंपरा बहुत समय से प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणों वाली होती हैं। यही कारण है कि घरों में रातभर खीर को चांदनी में रखा जाता है। अगले दिन भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के तौर पर इसको ग्रहण किया जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर यानी आज मनाई जा रही है।
मां लक्ष्मी की होती है पूजा
शरद पूर्णिमा को कोजगारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस रात मां लक्ष्मी की खास पूजा का महत्व होता है। पंचाग गणना के मुताबिक, निशीथ काल में पूजा का समय 25 अक्टूबर की रात में 11:40 से लेकर 26 अक्टूबर की रात 12:31 मिनट तक बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती है। ऐसे में जो भक्त जागकर उनकी आराधना करते हैं उनको मां सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। कई परिवार रात में दीपक जलाते हैं और मंत्र का जाप करते हैं।
सुबह निकालें रात को चांदनी के नीचे रखी खीर
शरद पूर्णिमा की रात को चांदनी में जो खीर रखी जाती है उसको अगले दिन सुबह निकाल लिया जाता है। इसके बाद स्नान और पूजा करके भगवान को इसका भोग लगाया जाता है। खीर निकालने के लिए सभी जगह एक ही समय नहीं है। खीर को रातभर खुले में रखने पर धूल-मिट्टी और कीड़ों से बचाने के लिए बर्तन में जालीदार ढक्कन ने ढक दें। मौसम गर्म हो या फिर उमस भरा हो लंबे समय तक बाहर रखी हुई खीर खाने से बचें।
इसलिए रखी जाती है खीर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। उसकी शीतल किरणों को अमृत के समान माना जाता है। इसी विश्वास के कारण दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने की परंपरा मशहूर है। अगली सुबह खीर को भगवान को अर्पित करके प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया जाता है। कुछ परिवार खीर में तुलसी का पत्ता भी डालते है। चांदनी में रखने से खीर में खास औषधीय गुण पैदा होने की बात धार्मिक मान्यता है।