चंडीगढ़: पराली प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 1,325.35 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है। इसके परिणामस्वरूप अब राज्य में 94,456 फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें उपलब्ध हैं और पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में पराली जलाने के 49,922 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2025 में घटकर मात्र 5,114 रह गए।
पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों के आंकड़े जारी करते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि सरकार इस अभियान में कोई ढिलाई नहीं बरत रही है। वर्ष 2026-27 के सीजन के लिए किसानों ने लगभग 201 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ उठाते हुए 22,763 सीआरएम मशीनें खरीद ली हैं। इससे पंजाब पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 से अब तक 1,325 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके 94 हजार से अधिक सीआरएम मशीनें उपलब्ध करवाना पंजाब की मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार की किसान हितैषी नीति पर जोर देते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि छोटे और मध्यम किसानों को सक्षम बनाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) के लिए निर्धारित कुल धनराशि का 75 प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के लिए आरक्षित रखा गया है।
गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इस विशेष आवंटन से आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) पराली प्रबंधन मशीनरी तक पहुंच आसान हुई है। इसके सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। इस वर्ष 846 पी ए सी एस को 3,247 मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं, जबकि पिछले वर्ष 300 पैक्स को केवल 1,262 मशीनें दी गई थीं। यह इस दिशा में हुई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।
