नई दिल्ली: ईरान से झुकने से इंकार करने के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित करने की कोशिश की है परंतु अब तक के हालात ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में नौसैनिक ताकत की सीमाएं उजागर कर दी है। अमेरिकी नौसेना की तैनात के बाद भी कई टैंकर इस नाकेबंदी को पार करने में सफल रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में तैनाती कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखी है लेकिन वह पूरी तरह से नाकेबंदी लागू नहीं कर पाई। इंडिया टूडे के रिपोर्ट्स दर्जनों टैंकर इस क्षेत्र से निकलने में सफल रहे हैं। एक ऐसा रास्ता भी बताया जा रहा है जिससे जहाज सीधे ईरान खार्ग द्वीप से मुंबई तक पहुंच सकते हैं।
भारत पहुंचा कच्चा तेल
हाल ही में भारतीय जहाज देश गरिमा इस मार्ग से गुजरकर मुंबई पहुंचा हालांकि रास्ते में इस पर ईरानी फायरिंग भी हुई फिर भी यह सुरक्षित पहुंच गया। इस टैंकर में कतर के रस लाफान से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा था। बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल से शुरु हुई नाकेबंदी के बाद 30 से ज्यादा टैंकर इस स्ट्रेट को पार कर चुके हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 34 टैंकर जिनका संबंध ईरान में है। नाकेबंदी को पार कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, फिलहाल 14 भारतीय जहाज होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जहाज खार्ग द्वीप से लोड होने के बाद फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के जरिए आगे बढ़ते हैं। एक रास्ता पाकिस्तान के मकरान तट के साथ-साथ गुजरता है। जहां जहाज ईरानी जल क्षेत्र से सीधे पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। दूसरा रास्ता ईरान के तट के साथ चलते हुए चाबहार पोर्ट तक पहुंचता है। जहां से जहाज दक्षिण की ओर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश कर सीधे भारत के पश्चिमी तटों महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक या केरल तक जा सकते हैं।
पाकिस्तानी जलक्षेत्र से गुजरना कितना संभव?
संयुक्त राष्ट्र समुद्री प्रतिबंध भी लागू है। इससे इस मार्ग का इस्तेमाल व्यवहारिक रुप से कठिन हो जाता है।एक पूर्व नौसेना अधिकारी के अनुसार, भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने में भारतीय नौसेना अहम भूमिका निभा रही है। जहाजों के लिए पहले कूटनीतिक स्तर पर अनुमति ली जाती है। फिर ओमान की खाड़ी में सुरक्षित स्थान पर नौसेना उन्हें एस्कॉर्ट करती है। उन्होंने बताया कि भारतीय जहाजों को पाकिस्तानी जलक्षेत्र में जाने की जरुरत नहीं होती क्योंकि वे सीधे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से भारत के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं।
अमेरिकी नाकेबंदी की सीमाएं साफ
अमेरिका अब तक 28 जहाजों को वापिस लौटने का निर्देश दे चुका है कुछ को रोका भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़ी सफलता बताया है लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिकी नौसेना किसी भी देश के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकती है हालांकि अमेरिका का दावा है कि नाकेबंदी से ईरान की तेल आय प्रभावित हो रही है लेकिन सस्ते तेल की सप्लाई जारी रहने से साफ है कि आधुनिक दौर में पूर्ण नाकेबंदी करना आसान नहीं है।
ईरान के जलक्षेत्र या अंतरराष्ट्रीय मार्गों का इस्तेमाल करके टैंकर भारत तक पहुंच रहे हैं। इससे यह साफ हो गया है कि खार्ग द्वीप से मुंबई तक का सफर संभव है। यह स्थिति भविष्य में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।
