मेरठः पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निरोधक) टीम ने गंगानगर थाने में तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक (दरोगा) प्रकाश चंद को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की चर्चा तेज हो गई। जानकारी के अनुसार, वर्ष 1993 बैच के दरोगा प्रकाश चंद एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने विवेचना के दौरान एक व्यक्ति का नाम मुकदमे से हटाने के बदले 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एंटी करप्शन टीम से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि एक मुकदमे में विवेचना से नाम निकालने के नाम पर प्रकाश चंद ने 2 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। एंटी करप्शन टीम ने पुलिस लाइन के गेट नंबर 3 से दारोगा को 20 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दारोगा ने रिश्वत की रकम लेने के लिए पीड़ित को पुलिस लाइन के गेट नंबर 3 पर बुलाया था। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने मामले का सत्यापन किया और शिकायत सही पाए जाने पर योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया।
तय योजना के तहत शिकायतकर्ता जब रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये लेकर दरोगा के पास पहुंचा, तभी पहले से मौके पर मौजूद टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रकाश चंद को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन टीम आरोपी दरोगा को अपने साथ ले गई और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। मामला ऐसे समय सामने आया है जब भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

