अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर मामला लगातार गरमा रहा है। राम मंदिर चढ़ावा में कथित अनियमितताओं के मामले में चल रही जांच के बीच ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय के इस्तीफा दे दिया है। लेकिन ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के कोषाध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘मुख्य जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि की है, उसके बाद अनिल मिश्रा की, जो वहां के सभी कामों में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
वहीं इस मामले की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार बैंक कर्मियों को 3 महीने पहले ही भनक लग गई थी। ऐसे में 3 महीने पहले दान चोरी की भनक लगने पर दान के पैसे गिनने वाले लोगों को हटाने की सिफारिश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से की गई थी। इस पर आउटसोर्सिंग कंपनी गणनाकर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने वाली थी, लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारी गणनाकर्मियों के बचाव में आ गए थे और किसी को भी हटने नहीं दिया। पुलिस अब इस दिशा में भी जांच शुरू कर सकती है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के रसूख के आगे बेबस बैंक अधिकारी गणनाकर्मियों को हटा नहीं सके और चोरी का खेल चलता रहा।
गणना प्रक्रिया में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, अवनीश और करुणेश शुक्ला समेत अन्य तमाम कर्मियों की भर्ती बैंक ने एक आउटसोर्सिंग कंपनी से कराई थी। लेकिन ये सभी लोग ट्रस्ट के पदाधिकारियों के रिश्तेदार, करीबी थे। मतलब सैलरी बैंक देता था, लेकिन कर्मी ट्रस्ट के लोग थे। टिन्नू यादव समेत 8 लोगों को पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिया है। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दो बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है। पुलिस जांच में ये पता चला है कि दो बैंक काउंटिंग के दौरान बैंक की तरफ से निगरानी के लिए मौजूद रहते थे। पूरा खेल उनकी मिलीभगत से चल रहा था। पुलिस को दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच ने भी बैंककर्मियों की भूमिका की तरफ इशारा कर रही थी। जल्द इन कर्मचारियों पर पुलिस का शिकंजा कसेगा।

