मनालीः हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिलें ग्लेशियर पिघलने से भारी तबाही मच गई। दरअसल, लाहौल-स्पीति में लगातार बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से जाहलमा नाले में एक बार फिर बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। बाढ़ के चलते नाले पर बनाया गया अस्थायी वैकल्पिक मार्ग भी बह गया, जिससे दोनों ओर दर्जनों वाहन, पर्यटक, सरकारी कर्मचारी, विद्यार्थी और स्थानीय लोग फंस गए हैं। पहाड़ों में ग्लेशियर पिघलने से नालों में बाढ़ आ रही है। इससे दूर-दराज के इलाके को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा बह गया और 50 से ज्यादा पर्यटकों की गाड़ियां फंस गईं। लाहौल-स्पीति की पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला ने बताया कि नाले में पानी बढ़ने से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके बाद पर्यटकों की 50 से ज्यादा गाड़ियां फंस गईं।
पानी के बहाव में अचानक तेजी आने से जाहलमा नाले में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिससे मनाली-लेह हाईवे का एक हिस्सा बह गया। लाहौल-स्पीति जिले में अचानक आई बाढ़ के कारण मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है और करीब एक दर्जन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। बाढ़ के साथ आए मलबे के कारण जिला मुख्यालय केलांग जाने वाला मार्ग अवरुद्ध हो गया। जिले के दूरदराज के इलाकों को जोड़ने वाला जॉबरंग पुल भी पानी में डूब गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिस्पा में अचानक आई बाढ़ के कारण मनाली-लेह राजमार्ग बंद हो गया। झालमा नाले में आई बाढ़ के चलते कई गांवों तक पहुंचना संभव नहीं है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बर्फ पिघलने से झालमा नाले का जलस्तर बढ़ गया है। अचानक आई बाढ़ के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 70 आरसीसी इकाई तीन मशीनों की मदद से मनाली-लेह राजमार्ग को बहाल करने के काम में जुटीं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में 2 और 3 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी करते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। कांगड़ा और मंडी जिलों के लिए दो तथा तीन जुलाई को, जबकि कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए तीन जुलाई को ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। शिमला, कांगड़ा और सुंदरनगर में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हुईं।

