नई दिल्ली: चीन के कॉमर्स मंत्रालय ने 20 जापानी संस्थाओं पर सख्त निर्यात नियंत्रण उपाय लागू करने की घोषणा की है। चीनी मंत्रालय ने अपने इस कदम के पीछे का मकसद जापान के फिर से सैन्यीकरण और परमाणु महत्वकांक्षाओं को रोकना बताया है। चीन ने साफ किया है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच सामान्य आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस कार्रवाई के अंतर्गत चीनी निर्यातकों और विदेशी संगठनों को इन जापानी संस्थाओं को चीन से उत्पन्न होने वाली दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं का निर्यात या हंस्तातरण करने से पूरी तरह प्रतिबांधित कर दिया गया है। प्रतिबंधित की गई इन संस्थाओं में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज भी शामिल है। इसका सीधा संबंध जापान की सैन्य ताकत की बढ़ाने से है।
चीनी वाण्जिय मंत्रालय ने पूरी तरह साफ किया
चीनी वाण्जिय मंत्रालय ने ये पूरी तरह साफ किया है कि ये नए सुरक्षा उपाय सिर्फ केवल कुछ ही जापानी संस्थाओं पर लागू होंगे। ये प्रतिबंध केवल दोहरे इस्तेमाल वाले सामान पर लागू होंगे। चीन का ये भी कहना है कि उनके इस कदम का चीन और जापान के बीच होने वाले सामान्य आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों देशों के बीच नियमित व्यापारिक गतिविधियां हमेशा की तरह सामान्य रुप से चलती रहेगी।
इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य जापान की बढ़ती सैन्य ताकत और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना है जिन 20 जापानी संस्थाओं को इस निर्यात नियंत्रण सूची में जोड़ा गया है। उनका संबंध जापान की सैन्य शक्ति को मजबूत करने वाली गतिविधियों से पाया गया है। चीन का ये कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है। चीन जापान की हालिया सैन्य गतिविधियों और रक्षा क्षमता विस्तार को लेकर लगातार चिंता जता रहा है।

