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साइबर ठगों ने अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले में दपंति को डराया

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दूसरे मामले में पुलिस अधिकारी बता किया डिजिटल अरेस्ट, ठगे 2:15 करोड रुपए

चंडीगढ़ः साइबर ठग अब लोगों को डराने के लिए देश के चर्चित और संवेदनशील मामलों का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में सामने आए दो मामलों में रिटायर्ड बुजुर्ग दंपतियों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर निशाना बनाया गया। एक मामले में बेटी की सतर्कता के कारण परिवार करोड़ों की ठगी से बच गया, जबकि दूसरे में ठगों ने खुद को पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर रिटायर्ड दंपती से 2.15 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। दोनों मामलों की जांच चंडीगढ़ साइबर थाना पुलिस द्वारा की जा रही है।

सेक्टर-49 निवासी एक युवक ने साइबर थाने में शिकायत दी कि उसके माता-पिता एसबीआई से वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त हैं। पिछले सप्ताह जब वह काम से बाहर था, तभी उसके माता-पिता के पास वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी के आरोपियों से उनका मोबाइल नंबर मिला है।

उनका इस मामले से संबंध है। उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है। गिरफ्तारी के डर से दंपती करीब तीन घंटे तक कमरे में बंद रहे। इस दौरान ठगों ने उनसे बैंक खातों की पूरी जानकारी ले ली और एफडी तुड़वाने तक के लिए राजी कर लिया। घर में मौजूद उनकी बेटी को शक हुआ कि माता-पिता कमरे से बाहर नहीं आ रहे हैं। उसने लगातार करीब आधे घंटे तक दरवाजा खटखटाया। ठग वीडियो कॉल पर दंपती को धमका रहे थे कि दरवाजा खोला तो बेटी को भी मामले में फंसा दिया जाएगा। आखिरकार मां ने दरवाजा खोला। बेटी ने तुरंत मोबाइल लेकर कॉल काट दी और अपने भाई को सूचना दी। इसके बाद परिवार ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

दूसरा मामला पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त दरबारा सिंह और उनकी पत्नी का है। साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार, दंपती को वीडियो कॉल कर एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई के बांद्रा थाने का आईपीएस अधिकारी रवि कुमार बताया।

उसने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी ने उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया है और मुंबई पुलिस उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है। कुछ देर बाद दूसरी वीडियो कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। ठगों ने दंपती से उनकी संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी मांगी तथा कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी रकम सरकारी कस्टडी में रखी जाएगी और बाद में लौटा दी जाएगी।

ठगों ने दंपती को लगातार धमकाया कि उनके लोग आसपास नजर रख रहे हैं और यदि किसी को जानकारी दी तो तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। डर के कारण दंपती बैंक पहुंचे, लेकिन पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉल चालू रही। बैंक परिसर में कार के अंदर बैठकर उन्होंने आरटीजीएस के जरिए 2.15 करोड़ रुपए ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

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