चंडीगढ़: गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की जान बचाने की तैयारियों को और मजबूत करते हुए हरियाणा सरकार प्रदेश में लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से 19 अतिरिक्त नवजात वेंटिलेटर उपलब्ध करवाने जा रही है। प्रदेश की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) में पहले से 54 नवजात वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। इन 19 नए वेंटिलेटर के जुड़ने से गंभीर परिस्थितियों में नवजात शिशुओं को समय पर श्वसन सहायता उपलब्ध करवाने की क्षमता और मजबूत होगी।
इसके साथ ही हरियाणा सरकार विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को एकीकृत मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेशव्यापी पहल कर रही है। इसके तहत चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त परिस्थितियों में अस्पताल में उपचार के दौरान मां को अपने नवजात शिशु के साथ रहने की सुविधा दी जाएगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को यह जानकारी दी।
नई व्यवस्था के तहत माताओं को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान अपने शिशुओं के पास रहने और प्रशिक्षित डॉक्टरों तथा नर्सों की देखरेख में उनकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, मां की निरंतर उपस्थिति से माताओं में अपने शिशुओं की देखभाल को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान अनावश्यक अलगाव से होने वाली मानसिक परेशानी भी कम होगी। आवश्यकता और उपयुक्तता के अनुसार परिवार के अन्य सदस्य भी स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में शिशु की नियमित देखभाल में भाग ले सकेंगे।
नवजात शिशु की चिकित्सकीय स्थिति और स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं के अनुसार उपचार में ऑक्सीजन सपोर्ट, कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) सहायता, पीलिया के उपचार के लिए फोटोथेरेपी, दूध पिलाने में सहायता और निर्धारित दवाइयां शामिल हो सकती हैं।
