चंडीगढ़: राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला (एनआईए) में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा का दायरा बढ़ेगा। एनआईए में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे, जिससे शोध, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) की ओर से एनआईए को 14 स्नातकोत्तर (पीजी पाठ्यक्रम) में 70 सीटों को मंजूरी दी है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पीजी पाठ्यक्रम में नए दाखिले शुरू होंगे।
एनसीआईएसएम ने एनआईए, पंचकूला 70 सीटों के साथ 14 पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए अनुमति पत्र (एलओपी) जारी किया है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के डीम्ड विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस के रूप में संचालित एनआईए, पंचकूला में आयुर्वेद की 14 विधाओं में उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुले हैं। फिलहाल, संस्थान में बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) में 100 सीटें निर्धारित हैं। वर्ष 2024-25 में पहला बैच शुरू हुआ था। इसके बाद 2025-26 के बैच में विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।
अब 2026-27 में तीसरे बैच के लिए काउंसलिंग चल रही है, जिसके दो राउंड पूरे हो चुके हैं। डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी ने बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा के अथक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। 14 पीजी पाठ्यक्रमों की मंजूरी से आयुर्वेद शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण और शोध-अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
संजीव शर्मा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। नए पीजी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को शोध एवं अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
