फगवाड़ा: राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मामले की निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित को, चाहे वह किसी भी लिंग का हो, न्याय और संस्थागत सहयोग समान रूप से मिलना चाहिए। घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. मित्तल ने कहा कि हर पीड़ित को अपनी बात रखने का अधिकार है और उसके मामले की जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के होनी चाहिए। न्याय की प्रक्रिया केवल तथ्यों और कानून के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए। इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मित्तल ने कहा, “पुणे का केतन अग्रवाल मामला बेहद दुखद और चिंताजनक है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच के साथ न्याय मिलना चाहिए।”
पुरुषों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर अपने लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. मित्तल ने कहा कि उन्होंने संसद में ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल’ प्रस्तुत किया था। इस विधेयक का उद्देश्य पुरुषों के लिए ऐसी संस्थागत व्यवस्था स्थापित करना है, जहाँ उत्पीड़न, हिंसा, मानसिक प्रताड़ना या अन्य प्रकार के अन्याय का सामना करने वाले पुरुषों को सहायता, कानूनी संरक्षण और अपनी बात रखने का मंच मिल सके।
डॉ. मित्तल ने कहा, “मैंने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल प्रस्तुत किया है। हर पीड़ित को न्याय, सहयोग और कानून के तहत समान संरक्षण मिलना चाहिए। केतन का मामला हमें याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें भी संस्थागत सहायता, कानूनी सुरक्षा और अपनी आवाज़ रखने का अधिकार मिलना चाहिए। न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे उनका लिंग कोई भी हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और पीड़ितों को सहयोग देने से जुड़ी चर्चाओं में सभी वर्गों को समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए। भावनात्मक तनाव, हिंसा और उत्पीड़न किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकता है। इसलिए सभी के लिए सुलभ संस्थागत सहायता और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को मजबूत करता है तथा संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को सशक्त बनाता है। डॉ. मित्तल ने आग्रह किया कि इस मामले की जांच पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ होने दी जाए ताकि सत्य सामने आए और कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित हो सके।

