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Punjab News: बैकफुट पर आया चन्नी गुट, राणा और रंधावा के बदले सुर, देखें वीडियो

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चंडीगढ़ः पंजाब कांग्रेस में बगावती तेवर दिखा रहे पूर्व सीएम व जालंधर सांसद चरणजीत चन्नी गुट बैकफुट पर आ गया है। दरअसल, हाईकमान के किनारा करने के बाद चन्नी गुट झुक गया। मीडिया से बात करते हुए कपूरथला से विधायक राणा गुरजीत ने कहा कि ऑल इज वेल। हाईकमान से कोई बाहर नहीं, कोई ऊपर नहीं। उन्होंने कहा कि समय आने पर सब ठीक हो जाएगा। ये मेरा प्राइवेट घर है, आप अंदर आ गए अच्छा नहीं है। हाईमान से मिलने की बात पर राणा गुरजीत ने कहा कि ये हमारा इंटरनल मामला है। दरअसल, सांसद सुखजिंदर रंधावा, विधायक राणा गुरजीत और विधायक प्रगट सिंह के सुर बदल गए।

चन्नी गुट के 2 नेता AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। इनमें सांसद रंधावा भी शामिल हैं। नेताओं का कहना है कि हमारी किसी से कोई नाराजगी नहीं है। वहीं सांसद रंधावा का कहना है कि सारी पंजाब कांग्रेस एकजुट है। हम सब मिलकर इसे सुलझा लेंगे। उन्होंने कहा कि बघेल 6 जुलाई को पंजाब में 5 दिन के दौरे पर आए थे। कल उनका आखिरी दिन है। बता दें कि इससे पहले चन्नी दिल्ली जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी या उनकी टीम से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें टाइम नहीं मिला। इसके बाद चन्नी गुट ने चंडीगढ़ में विधायक राणा गुरजीत के घर में तीसरी मीटिंग बुलाई। जिसमें बघेल से मिलने का फैसला हो गया।

उधर, AICC के पंजाब प्रभारी बघेल दूसरी बार कह चुके हैं कि पंजाब में हाईकमान का फैसला नहीं बदलेगा। उन्होंने चन्नी गुट की जिद को यह कहकर भी मखौल उड़ाया कि यह कोई गुड्‌डे-गुड्‌डी का खेल नहीं है। बघेल ने साफ कर दिया कि चन्नी और उनके गुट को हाईकमान का फैसला मानना ही होगा। चन्नी के अपने खेमे में 7 विधायक और एक सांसद के समर्थन के मुकाबले बघेल ने ये कहकर उन्हें संगठन की ताकत दिखाई कि 23 जिलों के प्रधान मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग के साथ हैं। चुनाव में MLA या पूर्व MLA को टिकट मिलेगी या नहीं, यह अभी तय नहीं लेकिन ग्राउंड पर वर्किंग के लिए जिला प्रधान ही काम आने हैं। इसलिए हाईकमान वड़िंग पर भरोसा दिखा रहा है।पॉलिटिकल एक्सपर्ट के मुताबिक पंजाब कांग्रेस में अगले 2 दिन अहम हैं। चन्नी और उनके समर्थक टूट गए तो फिर चन्नी को कोई तरजीह नहीं मिलेगी। हालांकि अगर सब एकजुट रहे तो चन्नी के साथ हो रहे व्यवहार से दलित वोट बैंक पर असर का डर देख हाईकमान उनसे मुलाकात कर सकता है।

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